आर्थिक रूप से खस्ता हाल पाकिस्तान अब पैसे जुटाने के लिए किराए पर देगा पीएम इमरान खान का आधिकारिक आवास, पहले भी की जा चुकी हैं चीजें नीलाम
नई दिल्ली। पाकिस्तान ( Pakistan ) की आर्थिक स्थिति लगातार खराब ( Financial Crunch ) होती जा रही है। हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि अब प्रधानमंत्री इमरान खान ( PM Imran Khan ) के आधिकारिक आवास को ही किराए पर देने की नौबत आ चुकी है।
पीएम का ये आवास इस्लामाबाद में स्थित है। इस घर को किराए पर चढ़ाए जाने के लिए मार्केट में उतार भी दिया गया है, बस अच्छे किराएदार की तलाश है।
चीन से लेकर तुर्की तक मदद का हाथ बढ़ाने के बाद भी पाकिस्तान के आर्थिक हालात सुधर नहीं रहे हैं। खास बात यह है कि अब पाकिस्तान ने आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री इमरान खान अपना आधिकारिक निवास किराए पर दे रहे हैं।
इन कामों के लिए किराए पर दिया जाएगा पीएम हाउस
पैसे जुटाने के लिए प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास अब कल्चरल, फैशन और एजुकेशनल प्रोग्राम समेत अन्य इवेंट के लिए किराए पर दिया जाएगा। बता दें कि अगस्त 2019 में सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ( PTI ) ने प्रधानमंत्री के घर को विश्वविद्यालय में बदलने की घोषणा की थी।
हालांकि बाद में सरकार ने आवास को यूनिवर्सिटी में तब्दील करने की योजना को छोड़ दिया और इसके जरिए पैसे जुटाने का मन बनाया है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री आवास का सभागार, दो गेस्ट विंग्स और एक लॉन किराए पर देकर पैसा जुटाया जा सकता है।
ऐसा है पीएम हाउस
प्रधानमंत्री के आधिकारिक घर का नाम 'बनी गाला' है। बनी गाला स्टेट साढ़े 7 एकड़ में फैला है। ये पहाड़ की चोटी पर है जहां से चारों तरफ खूबसूरत वादियां फैली हैं। यहां एक बोटैनिकल गार्डन है और साथ ही एक झील भी मौजूद है। इसके अलावा स्विमिंग पूल , टेनिस कोर्ट और बाकी एशो आराम से लैस बनी गाला को पाकिस्तान का सबसे आलीशान बंगला भी कहा जाता है।
पहले भी इमरान ने उठाए ऐसे कदम
ये पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री इमरान खान ने पैसे जुटाने के लिए इस तरह का कदम उठाया हो। इससे पहले भी वे ऐसे कदम उठा चुके हैं। साल 2018 में 8 भैंसों को बेचकर 23 लाख रुपए जुटाए थे। इसी वर्ष इमरान ने 102 कारों को नीलाम कर दिया था।
हर पाकिस्तानी पर पौने दो लाख का कर्ज
पाकिस्तान की संसद में पेश की गई रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ था कि हर पाकिस्तान पर करीब 1 लाख 75 हजार का कर्ज है। पिछले दो वर्ष में ये कर्ज 46 फीसदी तक बढ़ा है।