दक्षिण एशिया में बाढ़ का कहर, अब तक 1200 लोगों की मौत

दक्षिण एशिया में बाढ़ का कहर, अब तक 1200 लोगों की मौत

Mohit sharma | Publish: Aug, 25 2017 05:41:00 PM (IST) एशिया

तीनों देशों में लाखों लोग आहार की गंभीर कमी और बाढ़ के प्रदूषित पानी के चलते बीमारियों का सामना कर रहे हैं।

नई दिल्ली। दक्षिण एशिया में मानसूनी बाढ़ से भयंकर मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है। भारत, नेपाल और बांग्लादेश में 1.60 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1200 से ऊपर पहुंच गई है। अकेले भारत में ही प्रभावित होने वालों की संख्या 1.10 करोड़ से अधिक है। हालांकि आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें राहत व बचाव कार्यों में जुटी हैं। एक इंटरनेशल एड एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक तीनों देश की पिछले तीन सालों से भयंकर बाढ़ का दंश झेल रहे हैं, लेकिन इस साल हालात अधिक विध्वंशक बने हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हालात में तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। तीनों देशों में लाखों लोग आहार की गंभीर कमी और बाढ़ के प्रदूषित पानी के चलते बीमारियों का सामना कर रहे हैं। खासकर बांग्लादेश और नेपाल में एक तिहाई से अधिक हिस्सा बाढ़ की चपेट में है। उन्हें डर है कि आने वाले दिनों तथा सप्ताहों में मानवीय संकट और गहरा सकता है।

बिहार में 379 लोगों की मौत

बिहार के सरकारी आंकड़ों की मानें तो यहां पिछले कुछ दिनों में ही बाढ़ से मरने वालों की संख्या 379 तक पहुंच गई है। जबकि हजारों लोगों को राहत कैंपों में भेजा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के मौसम विभाग ने आगामी दिनों में और भारी बारिश होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। यही नहीं बाढ़ के कारण यहां की खेती बिल्कुल चौपट हो गई है, जिससे बड़ी मात्रा में अन्न का संकट खड़े होने की आशंका बनी हुई है।

उत्तर प्रदेश में 88 लोगों की मौत

वहीं बिहार के पड़ोसी राज्य उत्तर पद्रेश में बाढ़ से अब तब 88 लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार 6 बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 850 लोगों के मारे जाने की खबर है।

नेपाल में 150 लोगों की मौत, 90,000 घर ध्वस्त

संयुक्त राष्ट्र ने इससे अब तक बाढ़ की सबसे खराब स्थिति बताया है। बाढ़ के कारण पड़ोसी देश नेपाल में 150 लोगों की मौत हो गई है और लगभग 90,000 घरों ध्वस्त हो गए हैं। जबकि बांग्लादेश में बाढ़ के कारण 134 लोगों की मौत हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ के कारण अब तक 10583 हेक्टेयर फसल बरबाद हो चुकी है। जबकि 600587 हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी है।

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