
नई दिल्ली। साल 2016 में प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद बंद हुए 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों का मामला बेशक भारत में सुलझ गया हो लेकिन नेपाल में अब भी ये मुद्दा बना हुआ है। दरअसल नेपाल में नोटबंदी के करीब डेढ़ साल बाद भी हजारों करोड़ रुपए के पुराने नोट हैं। इसके चलते नेपाल सरकार कई बार भारत सरकार से अनुरोध कर चुकी है कि इसके लिए उचित कदम उठाएं। अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उनके नेपाली समकक्ष के पी ओली के साथ होने वाली बैठक के दौरान इस विषय में बातचीत की जाएगी। आपको बता दें कि नेपाल के बैंकों और आम जनता के पास अनुमानित तौर पर करीब 1500 करोड़ रुपए के प्रतिबंधित भारतीय नोट उपलब्ध है।
नेपाल को माननी होंगी भारत की ये दो बड़ी शर्तें
जानकारी के मुताबिक नेपाल सरकार चाहती है कि भारत सरकार इन नोटों के बदले नए चलन वाले नोट जारी करने की व्यवस्था करें। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी की नेपाल के प्रधानमंत्री से द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत की ओर से दो शर्तें रखी जाएंगी। जिनमें से पहली शर्त यह है कि नेपाल की तरफ से इस बात की गारंटी हो कि जो भी व्यक्ति नोट बदलने के लिए आए, उन्हें उसकी पहचान की जानकारी देनी होगी। दूसरी शर्त ये है कि नोट बदलने के लिए एक निश्चित सीमा निर्धारित की जाएगी, जिसके बाद नोट बदलने के लिए उस व्यक्ति को अपनी इनकम का खुलासा करना होगा।
आश्वासन मिलने पर भारत करेगा नोट बदलने की व्यवस्था
नेपाल सरकार की ओर से इन दोनों शर्तों को मान लेने पर और भारत को आश्वासन देने पर भारत की तरफ से वहां प्रतिबंधित पुराने नोटों को बदलकर नए नोट जारी करने की व्यवस्था की जा सकती है।
इस कारण चिंतित है भारत
शर्तों के पीछे भारत की चिंता है कि नेपाल में भारी संख्या में भारतीयों ने अपना काला धन ठिकाने लगा रखा है। इसलिए अगर ठोस तैयारी और पुख्ता सावधानियों के बिना नेपाल में मौजूद पुराने नोटों के बदले नए नोट जारी किए गये तो काले कारोबारी भी इसका फायदा उठा सकते हैं। गौरतलब है कि आरबीआइ ने पिछले महीने भी नेपाल में करीब 49 लाख रुपये से ज्यादा प्रतिबंधित 500 और 1000 रुपये के नोट जब्त किए गए हैं।
Published on:
11 May 2018 01:35 pm
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