
भारत में 2024 में चंद्र ग्रहण दृश्य नहीं होने से धार्मिक गतिविधि नहीं करनी होगी
चंद्र ग्रहण क्या है समझने के लिए हमें खगोल विज्ञान का रूख करना होगा, इसके अनुसार चंद्रमा की परिक्रमा के दौरान जब सूर्य पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं, यानी चंद्रमा पृथ्वी के पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है। तब सूर्य का प्रकाश चंद्रमा पर नहीं पहंच पाता, जिससे चंद्रमा के इस हिस्से में अंधेरा छा जाता है और यह पृथ्वी से दिखाई नहीं देता। इसी घटना को चंद्र ग्रहण कहते हैं।
इस समय चंद्रमा का वह हिस्सा पूरी तरह या आंशिक तरह से पृथ्वी की छाया से ढंका रहता है। यह घटना पूर्णिमा तिथि को ही घटती है। लेकिन यह ग्रहण पृथ्वी के सभी हिस्से से एक समान रूप से नहीं दिखाई देती, कभी किसी हिस्से में दिखाई देती है और कभी किसी हिस्से में। जिस क्षेत्र से यह खगोलीय घटना दिखाई देती है, हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार वहीं ग्रहण लगा होना माना जाता है।
वहीं हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहु केतु जब चंद्रमा को ग्रसते हैं तब चंद्र ग्रहण लगता है। इस समय सूतक काल के धार्मिक नियमों का पालन करना पड़ता है। लेकिन साल 2024 में लगने वाले दोनों चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए यहां चंद्र ग्रहण नहीं लगेगा।
Lunar eclipse in India पंचांग के अनुसार साल 2024 में 25 मार्च सोमवार और 18 सितंबर बुधवार को पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगेगा। यह दोनों चंद्र ग्रहण दुनिया के दूसरे हिस्सों में दिखेंगे, भारत में यह ग्रहण दृश्य नहीं होगा। इसलिए यहां चंद्र ग्रहण सूतक मान्य नहीं होगा और न ही कोई धार्मिक गतिविधि करने की जरूर होगी।
साल 2024 का पहला चंद्र ग्रहणः सोमवार 25 मार्च 2024
साल 2024 का दूसरा चंद्र ग्रहणः बुधवार 18 सितंबर 2024
उपच्छाया से पहला स्पर्शः सुबह 10:24 बजे
परमग्रास चन्द्र ग्रहणः दोपहर 12:43 बजे
उपच्छाया से अन्तिम स्पर्शः दोपहर 03:01 बजे
चंद्रग्रहण का समयः 04 घंटे 36 मिनट 56 सेकेंड
उपच्छाया चंद्र ग्रहण का परिमाणः 0.95
नोटः यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए यहां सूतक काल नहीं लगेगा।
उपच्छाया से पहला स्पर्शः सुबह 06:12 बजे
प्रच्छाया से पहला स्पर्शः सुबह 07:44 बजे
परमग्रास चन्द्र ग्रहणः सुबह 08:14 बजे
प्रच्छाया से अन्तिम स्पर्शः सुबह 08:44 बजे
उपच्छाया से अन्तिम स्पर्शः सुबह 10:17 बजे
खण्डग्रास की अवधिः 59 मिनट 59 सेकण्ड
उपच्छाया की अवधिः 04 घंटे 04 मिनट 27 सेकेण्ड
चन्द्र ग्रहण का परिमाणः 0.08
उपच्छाया चन्द्र ग्रहण का परिमाणः 1.03 घंटा
नोटः यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए यहां मान्य नहीं है और किसी धार्मिक गतिविधि का पालन करने की जरूरत नहीं है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले और सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा पाठ धार्मिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। लेकिन ध्यान, मंत्र जाप वगैरह किया जाता है। ग्रहण के मोक्ष के बाद गंगा जल के छिड़काव और साफ सफाई के बाद ही पूजा की जाती है।
1. मान्यता के अनुसार ग्रहण शुरू होने से पहले ही स्नान ध्यान कर लेना चाहिए और सूतक काल में सिर्फ भजन-कीर्तन करें, इस समय मंदिर में पूजा पाठ नहीं करना चाहिए।
2. चंद्र ग्रहण के दिन दान करना बेहद शुभ होता है। ग्रहण खत्म होने के बाद घर में गंगा जल का छिड़काव करें और स्नान ध्यान के बाद दान करें।
3. ग्रहण शुरू होने से पहले ही खाने-पीने की खुली चीजों में तुलसी का पत्ता डालना न भूलें और पके भोजन को फेंक दें।
1. मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान भोजन या पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति की पाचन क्षमता प्रभावित होती है और बीमार होने की आशंका रहती है।
2. ग्रहण के दौरान कोई भी नया काम या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता। ऐसा करने से उस काम में असफलता मिलती है।
3. ग्रहण के दौरान नाखून कांटना, बालों में कंघी करना और दांतों की सफाई करना अच्छा नहीं माना जाता है। ग्रहण के समय सोने पर भी रोक है।
4. ग्रहण के दौरान चाकू या धारदार चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
Updated on:
25 Mar 2024 10:51 am
Published on:
22 Feb 2024 04:10 pm
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