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Hindu Nav Varsh 2026: खास ग्रह संयोग में शुरू होगा नया साल, गुरु-मंगल की युति से बन सकते हैं बड़े बदलाव के योग

Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष की शुरुआत केवल समय का बदलाव नहीं होती, बल्कि ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति से जुड़ी होती है। वर्ष 2026 का हिंदू नववर्ष भी कुछ महत्वपूर्ण ग्रह संयोगों के बीच आरंभ होने जा रहा है।

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भारत

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MEGHA ROY

Mar 16, 2026

Hindu Nav Varsh 2026 date and significance, Hindu New Year ,

गुरु-मंगल की युति में होगा हिंदू नववर्ष का आगाज|फोटो सोर्स- Freepik

Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नए साल की शुरुआत मानी जाती है। साल 2026 में यह पावन अवसर 19 मार्च, गुरुवार को पड़ रहा है, जब हिंदू नववर्ष का आगाज होगा। खास बात यह है कि इस बार नववर्ष की शुरुआत गुरु और मंगल की युति जैसे महत्वपूर्ण ग्रह संयोग में हो रही है, जिसे ज्योतिष में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे खास ग्रह योग आने वाले समय में कई बड़े बदलावों के संकेत देते हैं। आइए जानते हैं कि विक्रम संवत 2083 की शुरुआत किन ज्योतिषीय प्रभावों के साथ होगी और इसका लोगों के जीवन पर क्या असर पड़ सकता है।

इस साल कौन होगा ‘राजा’ और ‘मंत्री’?

ज्योतिष परंपरा में हर नए संवत्सर के साथ ग्रहों की एक प्रतीकात्मक “कैबिनेट” मानी जाती है। जिस दिन से वर्ष का आरंभ होता है, उस दिन का स्वामी ग्रह उस साल का राजा कहलाता है। साल 2026 में हिंदू नववर्ष गुरुवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इस वर्ष के राजा देवगुरु बृहस्पति माने जाएंगे।
बृहस्पति को ज्ञान, धर्म और सकारात्मकता का प्रतीक ग्रह माना जाता है। ऐसे में यह वर्ष धार्मिक गतिविधियों, शिक्षा और आध्यात्मिक चिंतन के लिए अनुकूल माना जा रहा है। वहीं मंत्री का पद मंगल ग्रह को मिलेगा। मंगल साहस, ऊर्जा और निर्णय क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए कई मामलों में तेज और निर्णायक कदम देखने को मिल सकते हैं।

‘रौद्र’ संवत्सर का प्रभाव

इस बार नए संवत्सर का नाम ‘रौद्र’ बताया गया है, जिसे परंपरागत रूप से उग्र ऊर्जा का संकेत माना जाता है। कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ऐसे संवत्सर में मौसम और सामाजिक परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। वर्षा सामान्य से थोड़ी कम रहने की संभावना भी जताई जाती है, जिससे कृषि क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।साथ ही वर्ष की शुरुआत उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और मीन लग्न में होने के कारण प्राकृतिक घटनाओं और राजनीतिक परिस्थितियों में समय-समय पर बदलाव की स्थिति बन सकती है।

चैत्र नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

हिंदू नववर्ष के साथ ही चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व भी शुरू होता है। इन दिनों में भक्त मां शक्ति की पूजा-अर्चना कर जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता की कामना करते हैं। ठंड के मौसम की विदाई और गर्मी के आगमन के बीच आने वाला यह समय हमें संतुलित और सात्विक जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा भी देता है।