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Vedic Astrology- वैदिक ज्योतिष में मंगल सभी 12 भावों में इसका असर

- मंगल प्रबल है तो श्रम के बल पर मिलती सफलता

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Deepesh Tiwari

Sep 23, 2023

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मंगल को देवताओं का सेनापति माना जाता है। इसके कारक देव श्रीराम भक्त हनुमान माने गए हैं, वहीं सप्ताह में इसका दिन मंगलवार है। इस दिन श्री हनुमान के अलावा मां भगवती की पूजा का भी विधान है। मनुष्य जीवन के लिए यह बड़ा प्रभावकारी ग्रह है। मंगल दोष के कारण लोगों के विवाह में तक कठिनाई आती है। वहीं मंगल का रत्न मूंगा जबकि रंग लाल माना जाता है।

दरअसल कुंडली में मंगल महत्त्वपूर्ण ग्रह है। मंगल की स्थिति जिस नक्षत्र, घर या दशा में होती है उसी के अनुसार व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव पड़ता है। यदि कुंडली में मंगल अच्छे घर का स्वामी है तो ऐसे लोग अत्यधिक ऊर्जावान होते हैं। ऐसे लोग कठिन परिश्रम में विश्वास करते हैं और परिश्रम के बल पर सफलता हासिल करते हैं। साथ ही मंगल के कारण ऐसे लोग हमेशा पहल करने में विश्वास करते हैं।

वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह ऊर्जा, भाई, भूमि, शक्ति, साहस, पराक्रम, शौर्य का कारक होता है। मंगल ग्रह को मेष और वृश्चिक राशि का स्वामित्व प्राप्त है। यह मकर राशि में उच्च होता है, जबकि कर्क इसकी नीच राशि है। वहीं नक्षत्रों में यह मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी होता है।

गरुण पुराण के अनुसार मनुष्य के शरीर में नेत्र मंगल ग्रह का स्थान है। यदि किसी जातक का मंगल अच्छा हो तो वह स्वभाव से निडर और साहसी होगा तथा युद्ध में वह विजय प्राप्त करेगा। लेकिन यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में बैठा हो तो जातक को विविध क्षेत्रों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

ज्यादातर ऐसे लोग खेल, सेना जैसे प्रोफेशन से जुड़े होते हैं। लेकिन यदि आपकी कुंडली में मंगल की दशा खराब है तो यह आपकी मानसिक शांति को प्रभावित करता है। साथ ही मंगल की दशा विवाह पर भी प्रभाव डालती है। जिनका मंगल पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें घर में है ऐसे लोगों की कुंडली में मंगल दोष का योग होता है। ऐसे में विवाह योग में परेशानी हो सकती है। मंगल जिनका स्वामी हैं या मंगल की दशा खराब है तो किसी ज्योतिष के जानकार से परामर्श लेकर कोई उपाय कर सकते हैं।

वहीं हमारी जन्म कुंडली में स्थित सभी 12 भावों में इसका भिन्न भिन्न असर होता है।

प्रथम भाव में स्थित मंगल
ज्योतिष के अनुसार प्रथम भाव जातक की शारीरिक बनावट के साथ ही उसके स्वभाव को भी दर्शाता है। इस भाव में मंगल की स्थिति आपको अद्भुत साहसी बनाने के साथ ही आपके शारीरिक तौर पर भी काफी मजबूत होने को दर्शाती है। इसके कारण आप किसी भी प्रकार के दबाव रहना पसंद नहीं करते साथ ही आपके चेहरे पर लालिमा भी रहती है।


दूसरे भाव में मंगल
द्वितीय यानि संपत्ति के भाव में मंगल ग्रह की स्थिति बहुत क़डी मेहनत के बाद सफलता दिलाती है। यह स्थिति कभी-कभी बुरी आदतों और गलत माध्यमों के माध्यम से धन को खर्च करने का संकेत भी देती है। ऐसा व्यक्ति जरूरत से ज्यादा चिड़चिड़ा अथवा वाणी में कुछ कडवाहट लिए हुए होता है।

तीसरे भाव में मंगल
तृतीय भावका मंगल आपको शूरवीर और प्रसिद्ध बनाने के साथ ही धैर्यवान और साहसी व्यक्ति भी बनाता है। ऐसा व्यक्ति अपने बाहुबल से ऐश्वर्यवान बनता है साथ ही यह स्थिति भाइयों और विशेषकर छोटे भाइयों के कुछ कष्ट की ओर भी संकेत देती है।

चौथे भाव में मंगल
इस स्थिति में माता व सुख का यह भाव आपको वाहन सुख और संतान का सुख तो देगा, लेकिन मातॄ सुख में कमी लाएगा। आप कई तरीकों से लाभ कमाते रहेंगे, परंतु अग्नि से जुड़े खतरों का भय हमेशा बना रहेगा। आपके अपनी जन्मभूमि या घर से दूर रहने के संकेत हैं। अपने कार्यक्षेत्र में आप बड़ी तरक्की कर सकते हैं।

पंचम भाव में मंगल
बुद्धि व पुत्र के इस भाव में मंगल आपमें चंचलता के साथ बुद्धिमानी तो भी देगा, पर इसके साथ ही स्वभाव में उग्रता भी जल्द दिलाएगा। व्यसनी बनाने के अलावा यह बुद्धिमान होने के बावजूद आपको कोई-कोई निर्णय बिना विवेक के लेने की ओर भी प्रेरित करेगा। आपका प्रथम पुत्र ज्यादा गुस्सेल स्वभाव का होने के अलावा उसे दुर्घटनाओं का भी भय रहेगा।

छठे भाव में मंगल
शत्रु व रोग के इस भाव में मंगल आपको अपने नौकरों से परेशानी देने के संकेत देता है। लेकिन आप दुश्मनों को कुचलने की ताकत रखने के साथ ही बलवान व्यक्ति हैं। कई मामलों में आपका धैर्य प्रशंसनीय होने के साथ ही आप कभी-कभी आपके जरूरत से ज्यादा खर्चे कर सकते हैं।

सातवें भाव में मंगल
विवाह के इस भाव में स्थित मंगल अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना जाता है। यह विवाह में देरी का कारण बनने के अलावा आपके जीवनसाथी के दु:ख का कारण भी बनता है। यह स्थिति कभी-कभी अलगाव तक की स्थितियों का निर्माण कर देती है।

आठवें भाव में मंगल
आयु के इस भाव में मंगल की स्थिति अच्छा नहीं माना जाता है। यह आपके अधिकांश मामलों में बाधाएं लाता है। यह स्थिति शरीर में फोडे फुंसी या घाव होने की सम्भावनाएं बढ़ाती है। इसके साथ ही यह आग और चोरी की वजह से धन हानि की आशंका भी बढ़ता है। धन संचय के लिए मंगल की यह स्थिति अच्छी नहीं मानी जाती।

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नवे भाव में मंगल
भाग्य के इस भाव में मंगल व्यक्ति को अभिमानी बना सकता है। ऐसे लोग बड़ी सफलता तो प्राप्त करेंगे लेकिन उन्हें ये सफलता 27 वर्ष के बाद ही प्राप्त होगी। आपके अधिक भाई हो सकते हैं इसके अलावा आप पराक्रमी व्यक्ति भी हो सकते हैं। आपमें अधिक मात्रा में क्रोध होने के बावजूद मंगल की ये स्थिति आपको कोई नेता या बड़ा अधिकारी बनाने में मदद कर सकती है।

10वे भाव में मंगल
कर्म व विद्या के इस भाव में मंगल की यह स्थिति आपको धनवान बनाने के अलावा आपको कुछ विशेष गुण भी प्रदान करती है। इसके चलते प्रसिद्ध होने के साथ ही आप कुलदीपक की भूमिका भी निभाएंगे। यहां स्थित मंगल शल्य चिकित्सा या मंत्रों के ज्ञान में भी दक्ष बनाता है। 28 या 58वें वर्ष में आपकी कुछ विशेष उपलब्धि की ओर मंगल की यह स्थिति इशारा करती है।

11वें भाव में मंगल
आय के इस भाव में स्थित मंगल आपको धैर्यवान बनाने के साथ ही साहसी भी बनाएगा। यह आपको जीवन काल में खूब लाभ देगा। इसकी पंचम भाव में दृष्टि आपको संतान से संबंधित परेशानियां दे सकती है। जिसके चलते संतान की पैदाइश में देरी या गर्भपात जैसी स्थितियां भी निर्मित हो सकती हैं।

12वें भाव में मंगल
व्यय के इस भाव में स्थित मंगल अधिकतर विपरीत परिणाम ही देता है। ऐसी स्थिति में यह आपको कर्जदार भी बना सकता है। मंगल की ये स्थिति जहां शस्त्र विद्या में निपुण बनाती है, तो वहीं चोरों का भय भी उत्पन्न करती है। मंगल इस भाव में कभी-कभी फिजूलखर्ची के कारण आपके लिए आर्थिक विषमताओं का निर्माण करता है।