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Holashtak 2026: होली से 8 दिन पहले क्यों ससुराल में नहीं रहती नई बहू? जानें होलाष्टक का रहस्य

Holashtak 2026: हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य से पहले तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति देखी जाती है, और इसी क्रम में होली से आठ दिन पहले होलाष्टक का विशेष काल शुरू होता है।वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से प्रारंभ होकर होलिका दहन तक प्रभावी रहेगा।

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भारत

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MEGHA ROY

Feb 22, 2026

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Why Newly Married Bride Goes to Mayka in Holashtak|फोटो सोर्स- Freepik

Holashtak 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार होली से ठीक 8 दिन पहले होलाष्टक की शुरुआत हो जाती है, और वर्ष 2026 में यह 24 मार्च से प्रारंभ होंगे। इन आठ दिनों को मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, इसलिए शादी-ब्याह और शुभ समारोहों पर विराम लग जाता है। परंपरा के अनुसार नवविवाहित बहू इस दौरान अपने मायके चली जाती है और ससुराल में होली नहीं मनाती। आखिर इस मान्यता के पीछे क्या धार्मिक कारण हैं और शास्त्र क्या कहते हैं, आइए जानते हैं होलाष्टक का रहस्य।

होलाष्टक क्या है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक का समय होलाष्टक कहलाता है। इन दिनों में ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी मानी जाती है, जो मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं होती। विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य इन दिनों टाल दिए जाते हैं।ऐसा कहा जाता है कि यह समय वातावरण में उथल-पुथल और अग्नि तत्व की वृद्धि का होता है, क्योंकि इसी काल में होलिका दहन की तैयारी होती है।

होलाष्टक से पहले मायके क्यों जाती है नवविवाहिता?

नई बहू को लक्ष्मी स्वरूप मानना

नई दुल्हन को घर की लक्ष्मी माना जाता है। माना जाता है कि होलाष्टक के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। ऐसे में बहू की कोमल और नई ऊर्जा को सुरक्षित रखना आवश्यक समझा जाता है।

पहली होली की मान्यता

ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि विवाह के बाद पहली जलती होली (होलिका दहन) नवविवाहिता को ससुराल में नहीं देखनी चाहिए। इसे शुभ संकेत नहीं माना जाता। इसलिए उसे मायके भेजा जाता है।

रिश्तों की मधुरता बनाए रखना

लोक मान्यता यह भी कहती है कि यदि इस समय नवविवाहिता ससुराल में रहे तो सास-बहू के संबंधों में अनावश्यक तनाव आ सकता है। इसलिए परंपरा के रूप में उसे मायके भेजना शुभ माना जाता है।

मानसिक और भावनात्मक संतुलन

शादी के बाद लड़की का जीवन पूरी तरह बदल जाता है। ऐसे में पहली होली मायके में मनाने से उसे अपनापन और भावनात्मक सहारा मिलता है।

धार्मिक दृष्टि से क्या है इसका संदेश?

होलाष्टक केवल अशुभ समय नहीं, बल्कि आत्मसंयम और साधना का काल भी माना गया है। यह समय हमें बताता है कि जीवन में हर उत्सव से पहले धैर्य और संयम आवश्यक है। नवविवाहिता को मायके भेजने की परंपरा के पीछे मूल भाव उसकी सुरक्षा, सम्मान और शुभता की कामना है।