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लोहे की रिंग पहनने से पहले जान लें यह बात, गलती पर शनिदेव नहीं करेंगे माफ

rules to wear Iron ring लोहा शनि देव की धातु मानी जाती है, मान्यता है शनि देव की कृपा के लिए लोहे की अंगूठी पहननी चाहिए। लेकिन लोहे की रिंग पहनने का खास नियम है। किसी ज्योतिषी की सलाह से ही इसे नियमों का पालन कर पहनना चाहिए वर्ना गलती पर शनि देव माफ नहीं करते। लोहे की अंगूठी (Iron ring) किस हाथ में पहनना चाहिए, लोहे की रिंग पहनने के फायदे, लोहे का छल्ला पहनने की विधि, लोहे की अंगूठी किस उंगली में पहनना चाहिए जैसे सवाल आपके दिमाग में हैं तो इसके लिए पढ़ें पूरा लेख..

Mar 16, 2024 / 01:07 pm

Pravin Pandey

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लोहे की अंगूठी पहनने का संपूर्ण नियम


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लोहा शनि देव की धातु मानी जाती है। मान्यता है शनि देव लोहे में वास करते हैं। इसलिए शनि को प्रसन्न करने के लिए लोहे की अंगूठी पहनना चाहिए। इससे नकारात्मक शक्तियों और नजर दोष से भी व्यक्ति बचता है। इसके अलावा लोहे की रिंग पहनने से कई अन्य परेशानियों से बचा जा सकता है। शनि, राहु, केतु जैसे ग्रह शांत रहते हैं और लोहे की रिंग पहनने वाले व्यक्ति को नहीं सताते और घोड़े की नाल की अंगूठी पहनने से शनि दोष दूर होता है। घोड़े की नाल का छल्ला बुरी आत्माओं से भी बचाता है। इससे सुख संपत्ति और समृद्धि भी आती है। ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार लोहे की अंगूठी को कब और कैसे धारण करना चाहिए, इस बारे में जरूर जानना चाहिए

1. आचार्य वार्ष्णेय के अनुसार लोहे की अंगूठी या छल्ला धारण करने से पहले स्नान कर साफ कपड़े पहनें और शनि देव के बीज मंत्र का उच्चारण करते हुए इसे धारण करें।
2. लोहे की रिंग पुरुषों को दाएं हाथ की बड़ी अंगुली में पहननी चाहिए और महिलाओं को बाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में।
3. आचार्य वार्ष्णेय के अनुसार मध्यमा अंगुली शनि की अंगुली कहलाती है, यदि आप पर शनि की ढैय्या, साढ़ेसाती, शनि की महादशा, राहु या केतु की महादशा चल रही है, तो लोहे की अंगूठी इसके प्रभाव को कम करती है।
4. लोहे की अंगूठी शाम के समय ही धारण करना चाहिए और शनिवार के साथ रोहिणी, पुष्य, अनुराधा और उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में धारण करना ठीक रहता है।
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1. आचार्य वार्ष्णेय के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में बुध, शुक्र और सूर्य एक साथ हैं, उन्हें लोहे की अंगूठी नहीं पहनना चाहिए वर्ना उन्हें कष्ट झेलने पड़ते हैं। ऐसे लोग चांदी की अंगूठी पहन सकते हैं।
2. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली के 12वें भाव में बुध और राहु एक साथ हों या दोनों अलग-अलग भावों में नीच के हों तो ऐसे लोगों को अपनी उंगली में लोहे की अंगूठी नहीं पहनना चाहिए।
3. ऐसे लोग जिनकी की कुंडली में शनि शुभ फल दे रहा हो, उन्हें भी लोहे की अंगूठी नहीं पहननी चाहिए वर्ना हानि हो सकती है।

1. कुंडली में राहु और बुध की स्थिति मजबूत है तो लोहे की अंगूठी पहननी चाहिए।
2. यदि आप पर शनि की ढैय्या, साढ़ेसाती, शनि की महादशा, राहु या केतु की महादशा चल रही है तो लोहे की अंगूठी पहन सकते हैं यह इनको शांत रखती है।
3. नजर दोष से बचने के लिए भी लोहे की अंगूठी पहन सकते हैं।
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1. कभी भी दूसरे की उतारी हुई लोहे की अंगूठी नहीं पहननी चाहिए। अगर आप किसी और की उतारी हुई लोहे की अंगूठी पहनते हैं, तो उसका असर नहीं होता है।
2. जब तक मुसीबत टलती नहीं है, तब तक अंगूठी न उतारें और जैसे ही आप पर से बाधा हट जाती है, उस अंगूठी को बहते जल में प्रवाहित कर दें।
3. जब तक आपके ऊपर शनि या राहु-केतु का प्रकोप है, तब तक आपने जिस उंगली में लोहे का छल्ला धारण किया हुआ है, उसमें किसी अन्य धातु की अंगूठी न पहनें।

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