20 मार्च 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ये है चमत्कारी मंदिर, किन्नर भी हो गए प्रेग्नेंट, हर साल लगता हैं जोरदार मेला

अपने देश के लोग धर्म के प्रति गहरी आस्था रहते है। देश के हर कौन में कई चमत्कारी मंदिर बने हुए है। जिनके बारे में सुनने और पढ़ने के लिए मिलता है। इन चत्मकारी मंदिरों में दर्शन करने के लिए विदेशों से भी लोग आते है। आज आपको ऐसे चमत्कारी मंदिर में बारे में बताएंगे।

2 min read
Google source verification
bhilat dev nagalwadi

bhilat dev nagalwadi

नई दिल्ली। अपने देश के लोग धर्म के प्रति गहरी आस्था रहते है। देश के हर कौन में कई चमत्कारी मंदिर बने हुए है। जिनके बारे में सुनने और पढ़ने के लिए मिलता है। इन चत्मकारी मंदिरों में दर्शन करने के लिए विदेशों से भी लोग आते है। आज आपको ऐसे चमत्कारी मंदिर में बारे में बताएंगे। मध्य प्रदेश में एक अनोखा मंदिर है जहां पर नागदेवता की पूजा की जाती है। इस मंदिर में हर साल नागपंचमी पर जोरदार मेला भरता है। इस मंदिर को लेकर ऐसा कहा जाता है कि इसको करीब 700 साल पुराना है। यह बड़वानी में स्थित नागलवाड़ी शिखरधाम स्थित भीलटदेव मंदिर के नाम से मशहूर है।

किन्नर हो गया गर्भवती
नागलवाड़ी शिखरधाम मंदिर घने जंगल में एक विशाल पहाड़ी पर स्थित है। यह राजपुर तहसील में आता है। इस मंदिर को लेकर ऐसा कहा जाता है कि बाबा के दरबार में एक बार कोई किन्नर आए थे। किन्नर ने अपने लिए संतान मांग ली। बाबा ने उसे आशीर्वाद दिया किन्नर गर्भवती हो गया। कोई बच्चे के जन्म के लिए वो शारीरिक तौर पर सक्षम नहीं था, लिहाजा बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई। बताया जाता है कि इस किन्नर की यहां समाधि है। उसके बाद बाबा ने श्राप दिया कि कोई भी किन्नर नागलवाड़ी में नहीं रुकेगा।

यह भी पढ़े :— 45 वर्षीय रूपा क्षत्रिय हुलेट ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, बड़े बड़े फिटनेस एक्सपर्ट नहीं कर सके


शिवजी की कठोर तपस्या
बताया जाता है कि 853 साल पहले एमपी के हरदा जिले में नदी किनारे स्थित रोलगांव पाटन के एक गवली परिवार में बाबा भीलटदेव का जन्म हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि उनके माता-पिता मेदाबाई नामदेव शिवजी के भक्त थे। उन्हें कोई संतान नहीं थी, तो शिवजी की कठोर तपस्या की। उसके बाद बाबा का जन्म हुआ था।

शिव—पार्वती ने दिया था वचन
एक अन्य कहानी के अनुसार, शिव-पार्वती ने इनसे वचन लिया था कि वो रोज दूध-दही मांगने आएंगे। अगर नहीं पहचाना, तो बच्चे को उठा ले जाएंगे। एक दिन इनके मां-बाप भूल गए, तो शिव-पार्वती बाबा को उठा ले गए। बदले में पालने में शिवजी अपने गले का नाग रख गए। इसके बाद मां-बाप ने अपनी गलती मानी। इस पर शिव-पावर्ती ने कहा कि पालने में जो नाग छोड़ा है, उसे ही अपना बेटा समझें। इस तरह बाबा को लोग नागदेवता के रूप में पूजते हैं। आज यह मंदिर दुनियाभर में मशहूर है और यहां पर दर्शन के लिए लोग दूर दूर से आते है।