
Tata Nano Production Close
नई दिल्ली : Tata Nano भारत की पहली ऐसी कार थी जिसे लॉन्चिंग से पहले ही लोग बुक कर लेना चाहते थे। इस कार को लेकर ग्राहकों में जबरदस्त क्रेज़ था। ये एक छोटी कार थी जिसकी कीमत एक लाख से कुछ ज्यादा थी और इसे लखटकिया कार का नाम दिया गया था। इस कार का प्रोडक्शन अब पूरी तरह से बंद किया जा चुका है। हाल ही में आईआईटी कानपुर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे महिंद्रा एंड महिंद्रा ( Mahindra And Mahindra ) के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन गोयनका ( Pawan Goenka ) ने इस कार का प्रोडक्शन बंद ( Tata Nano production close ) होने की वजह बताई है।
पवन गोयनका ने बताया कि भारत में लोगों को बड़ी कार से चलने का शौक है और वो अकेले ही इसमें चलना चाहते हैं। भारतीयों के इसी शौक की वजह से टाटा नैनो कार बाजार में कोई मुकाम हासिल नहीं कर पाई और कंपनी को इसका प्रोडक्शन बंद करने का फैसला लेना पड़ा। टाटा नैनो रतन टाटा ( Ratan Tata ) ( चेयरमैन टाटा ग्रुप ) की महात्वाकांक्षी परियोजना थी जिसे आम भारतीयों की जरूरतों के हिसाब से डिज़ाइन किया गया था।
टाटा नैनों को बनाने के लिए कार इंजीनियर्स ने सालों तक मेहनत की थी और वो हर तरीका अपनाया था जिससे कार की कीमत को कम रखा जा सके और क्वालिटी से किसी भी तरह का खिलवाड़ ना किया जाए। सालों की मेहनत के बाद नैनो को तैयार किया गया था। कुछ साल तो जमकर नैनो के बिक्री हुई लेकिन इसके बाद लगातार इस कार की बिक्री गिरती चली गई और आखिर में साल 2019 में जब नैनो के एक भी यूनिट की बिक्री नहीं हुई तो कंपनी ने इस कार का प्रोडक्शन बंद करने का फैसला कर लिया।
गोयनका ने बताया कि, ''65-70 किलोग्राम वजन का एक भारतीय व्यक्ति 1,500 किलोग्राम वजन की कार में अकेले यात्र करता है। हमें व्यक्तिगत यातायात के लिए हल्के वाहनों की जरूरत है। इसको ध्यान में रखते हुए हमारी कंपनी ने एक छोटी कार पेश की है, जो जल्दी ही बाजार में उतारी जाएगी। प्रदूषण का जिक्र करते हुए गोयनका ने कहा कि कुल कार्बन में सात परसेंट और PM-2.5 में पांचवें हिस्से के बराबर उत्सर्जन ऑटोमोबाइल्स द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऑटो सेक्टर को इसे घटाने का पूरा प्रयास करना चाहिए। आधुनिकता के मामले में घरेलू बाजार संभावनाओं से भरा हुआ है। आइटी पावर होने के कारण यहां तकनीकी विकास की अपार संभावनाएं हैं।''
गोयनका ने यह भी बताया कि, '' इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में हम अभी चीन से पांच साल पीछे हैं। इलेक्ट्रिक कारों के मामले में भारतीय बाजार फिलहाल पिछड़ा हुआ है। पिछले वर्ष यहां सिर्फ 1,400 ई-कारें बिकीं। लेकिन घरेलू स्तर पर बैट्री, चार्जिग और दोपहिया, तिपहिया वाहनों के विकास पर काफी काम हो रहा है। गोयनका ने कहा कि देश के आर्थिक विकास में ऑटो इंडस्ट्री महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।''
Updated on:
23 Feb 2020 12:06 pm
Published on:
23 Feb 2020 12:04 pm
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