HT की एक रिपोर्ट के अनुसार, 15 साल से पुराने कारों के पंजीकरण को रेनुअल करने की लागत अब 5,000 रुपये होगी, जिसके लिए अब तक महज 600 रुपये चुकाना पड़ता है। वहीं दोपहिया वाहन के लिए, ग्राहक को 300 रुपये के बजाय 1,000 का भुगतान करना होगा। जबकि आयातित (Imported) कारों के लिए लागत 15,000 रुपये के बजाय 40,000 रुपये खर्च करना होगा।
रेनुअल में देरी पर देना होगा जुर्माना:
इसके अलावा, निजी वाहनों के पुन: पंजीकरण में देरी से हर महीने अतिरिक्त 3000 रुपये खर्च होंगे। कमर्शियल वाहनों के लिए हर महीने 500 का जुर्माना देना होगा। नए नियमों के मुताबिक, 15 साल से पुराने हर निजी वाहन को हर पांच साल में नवीनीकरण के लिए आवेदन करना होगा। हालाँकि, यह नियम राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को छूट देता है, ऐसा इसलिए है, क्योंकि शहर में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों को क्रमशः 15 और 10 वर्षों के बाद अपंजीकृत माना जाता है।