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जो भाजपा का साथी, वो रामघाती’ – राम मंदिर दान विवाद पर अखिलेश यादव का सबसे बड़ा हमला

Ram Mandir Donation Theft Row: राम मंदिर दान विवाद पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ इस्तीफा काफी नहीं है। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने, पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने और सभी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। साथ ही तंज कसते हुए दावा किया कि बीजेपी के कई नेता पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में आना चाहते हैं।
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अखिलेश यादव (फाइल फोटो- पत्रिकाि)

Ram Mandir Donation Theft Row:  राम मंदिर दान विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बार फिर बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सजा सिर्फ घोड़े या लगाम को नहीं, बल्कि कोचवान को भी मिलनी चाहिए। इस्तीफे का जिक्र करते हुए उन्होंने बिना नाम लिए चंपत राय पर निशाना साधा और कहा कि इस्तीफा बच निकलने का रास्ता नहीं बनना चाहिए। केवल इस्तीफे की लीपा-पोती से काम नहीं चलेगा। इसके साथ ही उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग भी की।

अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर लिखा, "ये कैसी पाबंदी है कि आरोपियों का स्वागत पुलिस दरवाजा खोलकर कर रही है। ड्राइवर फँसता तो मालिक भी फँसता। जिसका नाम अंतरिम रिपोर्ट में नहीं है, उसका अंतिम रिपोर्ट में कैसे होगा? जिसके ऊपर 'ठीकरा' फोड़ा गया, वह तो रिपोर्ट के हिसाब से काफी ठीक रहा।"

बीजेपी में भगदड़

अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, "अगर CDR निकाली जाए तो पता चल जाएगा कि सबसे ज्यादा फोन भाजपा के उन्हीं लोगों के आए हैं, जो पार्टी छोड़कर इधर आना चाहते हैं। इस चोरी के बाद उत्तर प्रदेश की जनता ने भाजपाइयों की नाकाबंदी कर दी है।"

उन्होंने आगे कहा, "जो लोग दूर बैठकर आरोप लगा रहे हैं, ऐसा लगता है कि इस महाकांड में उनकी भी हिस्सेदारी है। उनकी आमदनी की नहर बंद हो गई है, इसलिए वे छटपटा रहे हैं।"

पूरा ट्रस्ट भंग हो

अखिलेश यादव ने कहा कि सजा सिर्फ घोड़े या लगाम को नहीं, बल्कि कोचवान को भी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी केवल उस व्यक्ति की नहीं है, जिसे काम सौंपा गया, बल्कि उसकी भी है जिसने यह जिम्मेदारी सौंपी।

उन्होंने कहा, "सिर्फ खांचा नहीं, पूरा ढांचा बदलना चाहिए। यानी पूरा ट्रस्ट भंग होना चाहिए। इसके बाद सभी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। केवल इस्तीफे की लीपा-पोती से काम नहीं चलेगा। जिन लोगों को हटाया गया है, उनके हस्ताक्षर से हुए सभी भू-सौदों और अन्य कार्यों की न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए।"