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चिता समाधि, जल समाधि के बाद अब महंत परमहंस का आमरण अनशन का एलान

- महंत परमहंस ने हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए दी एक और तारीख- दिल्ली में रामलीला मैदान में 7 नवंबर 2023 को करेंगे अनशन

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चिता समाधि, जल समाधि के बाद अब महंत परमहंस का आमरण अनशन का एलान

चिता समाधि, जल समाधि के बाद अब महंत परमहंस का आमरण अनशन का एलान

अयोध्या. सरयू के चुल्लूभर पानी में नाक डुबोकर जलसमाधि की धमकी देने वाले महंत परमहंस अब दो साल बाद 7 नवंंबर 2023 को एक बार फिर जान देने की कोशिश करेंगे। इस बार परमहंस अयोध्या में नहीं बल्कि नयी दिल्ली में रामलीला मैदान में अनशन करेंगे। यह अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की घोषणा नहीं की जाती। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की एक और तारीख घोषित करने वाले महंत परमहंस अब तक कई बार चिता समाधि, जल समाधि का एलान कर चुके हैं। पहली बार उन्होंने आमरण अनशन की धमकी दी है।

हर संत की अपनी खास पहचान होती है। उसकी अपनी यूएसपी होती है। लगता महंत परमहंस दास की यूएसपी उनकी बार-बार मौत को गले लगा लेने की घोषणा है। बात श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण की हो, सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर से जुड़े फैसले की जल्द सुनवाई की हो, महंत नृत्य गोपाल दास से विवाद हो या फिर अब भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की जिद अपनी अलग तरह की घोषणाओं की वजह से परमहंस सुर्खियों में बने रहते हैं। खुद को राम बताने वाले परमहंस पूरे भारत को अपना परिवार बताते हैं। और देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए प्राणों को उत्सर्ग कर देना बहुत छोटा कर्म मानते हैं।

मध्य प्रदेश से आए अयोध्या

तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास देह त्याग के बहाने महंत से कहीं ज्यादा अब हिन्दुत्व के कट्टर पैरोकार धार्मिक नेता बनना चाहते हैं। आखिर कौन हैं परमहंस दास और कहां से है इनका नाता। यह जानने के लिए इतिहास के पन्नों को पलटना होगा- परमहंस दास अयोध्या की तपस्वी छावनी के स्वघोषित उत्तराधिकारी हैं। परमहंस दास मूलत: बिहार के रहने वाले हैं। इनके पिता मध्य प्रदेश में आकर बस गए थे। इस वजह से इनका बचपन मध्य प्रदेश के सीधी में बीता। यूं तो परमहंस का बचपन से ही अयोध्या से लगाव रहा लेकिन यह साधू रूप में 2009 में पहली बार अयोध्या 2009 में आए। तब इन्होंने महंत नृत्य गोपालदास को अपना गुरू बनाया था। फिर 2012 में तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर सर्वेश्वर दास की दीक्षा ली। यानी इनके दूसरे गुरु बने महंत सर्वेश्वर दास। तब से परमहंस यहां बतौर उत्तराधिकारी रहने लगे। हालांकि आज तक पीठाधीश्वर महंत सर्वेश्वर दास ने इन्हें घोषित रूप से कोई पद नहीं दिया है। लेकिन, परमहंस दास खुद को तपस्वी छावनी का पीठाधीश्वर और महंत घोषित कर चुके हैं। और खुद को पीठाधीश्वर जगतगुरु लिखते हैं।

चिता पर लेटकर आए चर्चा में

परमहंस दास पहली बार 2019 में राममंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही अंतिम सुनवाई से पहले चिता पर लेटकर चर्चा में आए थे। इसी मई माह में पश्चिम बंगाल में हिंसा न रुकने पर चिता समाधिक की घोषणा की थी। और एक बार फिर बीते 2 अक्टूबर 2021 को हिन्दू राष्ट्र को लेकर जल समाधि से सुर्खियों में आए। लेकिन इस बार हाउस अरेस्ट कर लिए गए।

नृत्य गोपाल दास से झगड़ चुके

2019 में परमहंस दास ने श्रीराम जन्मभूमि पर फैसले के बाद नृत्य गोपाल दास पर अभद्र टिप्पणी कर दी थी। तब इन्हें सर्वेश्वर दास ने तपस्वी छावनी से निष्काषित कर दिया था। उस समय परमहंस दास ने नृत्य गोपाल दास से खुद की जान का खतरा बताया था। बाद में माफी मांग ली और छावनी में वापसी हो गयी।

मोदी के लिए बुलाई थी संत सभा

2014 में परमहंस ने भाजपा के लिए प्रचार करते हुए वाराणसी में पीएम नरेंद्र मोदी का न केवल चुनाव प्रचार किया बल्कि यहां संत सभा का भी आयोजन किया था।

तपस्वी छावनी के बारे में जानें

पिछले 400 साल से तपस्वी छावनी का अयोध्या में अस्तिव है। वर्तमान में तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर सर्वेश्वर दास हैं। इन्हीं के संरक्षण में छावनी मठ की व्यवस्थाएं संचालित होती हैं।

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