13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अयोध्या में बन रही मस्जिद का नाम होगा ‘मुहम्मद बिन अब्दुल्ला मस्जिद, एआईआरएम ने लिया फैसला

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अयोध्या में पुरानी बाबरी मस्जिद की जगह धन्नीपुर में नई मस्जिद बन रही है। इस मस्जिद का नाम 'मुहम्मद बिन अब्दुल्ला मस्जिद' रखा जाएगा।

2 min read
Google source verification
Ayodhya mosque will be named 'Muhammad bin Abdullah Mosque' after the paigambar

मोहम्मद पैगंबर के नाम पर अयोध्या की मस्जिद का नाम होगा।

देश की सभी मस्जिदों के संगठन ऑल इंडिया राबता-ए-मस्जिद (एआईआरएम) ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के धन्नीपुर में प्रस्तावित मस्जिद का नाम पैगंबर के नाम पर 'मुहम्मद बिन अब्दुल्ला मस्जिद' रखने का फैसला किया है।

भाजपा नेता हाजी अरफात शेख की तरफ से एआईआरएम सम्मेलन में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में कई मुस्लिम संप्रदायों के सभी वरिष्ठ मौलवियों ने भाग लिया, जहां पर ये नाम रखने की घोषणा हुई। पुरानी बाबरी मस्जिद के मूल स्थान से धन्नीपुर मस्जिद लगभग 22 किमी दूर है। बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर 1992 को गिरा दिया गया था, अब इस स्थान पर भव्य भगवान राम मंदिर का निर्माण हो रहा है।

यह भी पढ़ें: Deoria Murder Case: 16 को देवरिया जाएंगे अखिलेश यादव, दूबे और यादव परिवार से करेंगे मुलाकात

9,000 श्रद्धालु मस्जिद में एक साथ अदा कर सकेंगे नमाज
हाजी अरफात शेख ने कहा कि नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आवंटित जगह पर बनने वाली नई मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिद होने का वादा करती है। मस्जिद में 5,000 पुरुषों और 4,000 महिलाओं समेत 9,000 श्रद्धालु एक साथ नमाज अदा कर सकेंगे। पूरे मस्जिद परिसर में, हमारे संसाधनों के माध्यम से अतिरिक्त भूमि की खरीद के साथ, चिकित्सा, शैक्षिक और सामाजिक सुविधाएं भी होंगी।

6 एकड़ जमीन में बन रही है मस्जिद
वहीं, अन्य वक्ताओं ने कहा कि सुप्रीम अदालत ने नई मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन दी थी। इसे एक ऐतिहासिक परियोजना बनाने के लिए अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करने के लिए 6 एकड़ जमीन खरीदने की योजना है।

हाजी अरफात शेख ने कहा कि भव्य 'मुहम्मद बिन अब्दुल्ला मस्जिद' परिसर का काम, विभिन्न समूहों के बीच कुछ मतभेदों के कारण विलंबित हो गया था। अब जल्द ही धन्नीपुर स्थल पर शुरू होने वाला है। नींव समारोह के लिए एक प्रतीकात्मक ईंट सुन्नी वक्फ बोर्ड ऑफ इंडिया, इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ऑफ इंडिया, सलामती पीर दरगाह ट्रस्ट और मेगा-प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य प्रमुख संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों को भी सौंपी गई।

यह भी पढ़ें: मिशन 2024 में 'परिवार प्रथम' की मुहर लगाने के लिए तैयार है अखिलेश, नवरात्रि में टिकटों की करेंगे घोषणा