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‘होली खेलैं रघुवीरा अवध मां, होली खेलैं…’, रामलला को गुलाल लगने के साथ वैष्णव मंदिरों में होलिकोत्सव शुरू

Holi: वसंत पंचमी के पर्व पर अबीर-गुलाल के साथ सोमवार से राम मंदिर समेत वैष्णव परम्परा के सभी मंदिरों में होलिकोत्सव का शुभारम्भ हो गया।

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Holi: वसंत पंचमी के पर्व पर प्रात काल भगवान के श्रृंगार के उपरांत अबीर-गुलाल का तिलक लगाया। इसके साथ साधु-संतों ने भी एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की बधाई दी। देर शाम सभी मंदिरों में आचार्यों द्वारा रचित होली के पदों का गायन शुरू हुआ जो शयन आरती तक चलता रहा। मधुर उपासना परम्परा के मंदिरों में होलिकोत्सव का रंग चटख होकर उभरा।

रामलला की विशेष सजावट

प्रयागराज के महाकुंभ के चलते यहां लगातार उमड़ रही भारी भीड़ के कारण वसंत पंचमी का पर्व भी राम मंदिर के लिए खास ही रहा। इसके चलते होलिकोत्सव का उल्लास भी कई गुना बढ़ गया। राम मंदिर में इसकी तैयारी भी की गयी थी। इस पर्व को लेकर रामलला के लिए निर्धारित डिजाइन के पीताम्बरी परिधानों को सिलवाया गया था। सभी मंदिरों में प्राय दिन के लिहाज से ही अलग-अलग रंग के परिधान भगवान के विग्रहों को धारण कराए जाते हैं लेकिन गुरुवार के अलावा उत्सवी माहौल में भगवान के विग्रहों को पीताम्बरी पोशाक ही धारण कराए जाते हैं।

भगवान को चढ़ाया गया अबीर-गुलाल

इसी क्रम में सोमवार को श्वेत रंग के बजाय रामलला को भी पीताम्बरी धारण कराकर विशेष रूप से स्वर्णाभूषणों से अलंकृत किया गया। इसके उपरांत भगवान को अबीर-गुलाल चढ़ाया गया। रामलला की श्रृंगार आरती के बाद पुजारियों ने भी परस्पर एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की बधाई दी। इसके साथ श्रद्धालुओं के मध्य भी अबीर-गुलाल उड़ाकर उत्सव रंग का संदेश दिया गया।

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मंदिरों में शुरू हुआ सांस्कृतिक संध्या का आयोजन

‘ होली खेलैं रघुवीरा अवध मां, होली खेलैं..’ के फिल्मी होली गीत के साथ आचार्य प्रणीत पदों का गायन विभिन्न मंदिरों में शुरू हो गया। यह परम्परागत आयोजन चैत्र रामनवमी में रामलला के प्राकट्य के दूसरे दिन तक चलता रहेगा। रंगभरी बधाई का अंतिम कार्यक्रम रसिक परम्परा की आचार्य पीठ लक्ष्मण किला में चैत्र शुक्ल दशमी को होगा।