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Ram Mandir Donation Dispute Row: जब पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर को MLA ने जड़ा था थप्पड़! जानिए उनसे जुड़े 5 बड़े किस्से

Ram Mandir Donation Dispute Row Ayodhya: राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने पहला आवेदन किया है। जानिए उनसे जुड़े 5 चर्चित किस्से, जिनकी वजह से वह सुर्खियों में रहे।
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पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर से जुड़े किस्से। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Ram Mandir Donation Dispute Row Ayodhya: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही पहला आवेदन उत्तर प्रदेशकैडर के पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर (Amitabh Thakur) की ओर से पहुंचा है। ट्रस्ट ने हाल ही में इस पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं और आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 18 जुलाई निर्धारित की गई है।

अमिताभ ठाकुर का कहना है कि ट्रस्ट द्वारा तय की गई सभी पात्रताओं और अनुभव संबंधी शर्तों को वह पूरा करते हैं। उनके मुताबिक, लंबे प्रशासनिक अनुभव के चलते वह इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को निभाने में सक्षम हैं। आवेदन के बाद एक बार फिर अमिताभ ठाकुर सुर्खियों में हैं। आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े 5 ऐसे चर्चित किस्से, जिन्होंने उन्हें लगातार चर्चा में बनाए रखा।

CEO पद के लिए क्यों पेश की दावेदारी?

अमिताभ ठाकुर ने आवेदन भेजने के बाद कहा कि ट्रस्ट ने जिस तरह की योग्यता, अनुभव और प्रशासनिक क्षमता की अपेक्षा की है, वह उन सभी मानकों पर खरे उतरते हैं। उनका मानना है कि सालों तक पुलिस और प्रशासनिक सेवा में काम करने का अनुभव इस पद की जिम्मेदारियों को निभाने में मददगार साबित होगा।

किस्सा-1: विकास दुबे एनकाउंटर से पहले की भविष्यवाणी

साल 2020 में कानपुर के बिकरू गांव में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद गैंगस्टर विकास दुबे ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में सरेंडर किया था। सरेंडर के तुरंत बाद अमिताभ ठाकुर ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि संभव है विकास दुबे पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश करते हुए मारा जाए और मामला वहीं समाप्त हो जाए।

उन्होंने उस समय यह भी कहा था कि असली जरूरत विकास दुबे से ज्यादा पुलिस व्यवस्था के भीतर मौजूद कमियों और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच करने की है। बाद में विकास दुबे पुलिस एनकाउंटर में मारा गया, जिसके बाद उनका यह पोस्ट काफी चर्चा में रहा।

किस्सा-2: मुलायम सिंह यादव के फोन कॉल का ऑडियो सार्वजनिक किया

साल 2015 में अमिताभ ठाकुर ने आरोप लगाया कि तत्कालीन समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने उन्हें फोन कर धमकाया और "सुधर जाने" की सलाह दी। अमिताभ ठाकुर ने इस बातचीत की रिकॉर्डिंग सार्वजनिक कर दी, जिससे बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

बाद में उन्होंने इस मामले में हजरतगंज थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया। मुलायम सिंह यादव ने फोन करने की बात स्वीकार की थी, लेकिन धमकी देने के आरोप से इनकार किया था। इसी विवाद के बाद अमिताभ ठाकुर पर रेप का आरोप लगा और उन्हें निलंबन का सामना भी करना पड़ा।

किस्सा-3: जब तत्कालीन SP अमिताभ ठाकुर को जड़ा गया थप्पड़

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये किस्सा 2006 का है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के जसराना क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पुलिस और स्थानीय नेताओं के बीच विवाद की स्थिति बन गई। उस समय अमिताभ ठाकुर जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात थे।

विधायक पर थप्पड़ मारने का आरोप

घटना के दौरान तत्कालीन समाजवादी पार्टी विधायक रामवीर सिंह पर आरोप लगा कि उन्होंने SP अमिताभ ठाकुर के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें थप्पड़ मार दिया।

किस्सा-4: फेसबुक के खिलाफ दर्ज कराई थी FIR

अमिताभ ठाकुर साहित्य और लेखन से भी जुड़े रहे हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले ठाकुर ने एक बार फेसबुक पर बने 'आई हेट गांधी' नाम के पेज का विरोध किया था। उन्होंने पहले फेसबुक से उस पेज को हटाने की मांग की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर फेसबुक के खिलाफ FIR दर्ज करा दी। इसके बाद संबंधित पेज हटा दिया गया। इस कदम की सोशल मीडिया पर काफी सराहना भी हुई थी।

किस्सा-5: धोनी को भेजा था 1000 रुपये का चेक

साल 2015 के क्रिकेट विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की हार के बाद अमिताभ ठाकुर ने तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को 1000 रुपये का चेक भेजा था। इसके साथ उन्होंने एक पत्र भी लिखा था, जिसमें हार के लिए व्यंग्यात्मक अंदाज में धन्यवाद दिया गया था। इसके अलावा अमिताभ ठाकुर फिल्मी गीत 'मुन्नी बदनाम हुई' और 'शीला की जवानी' जैसे गानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का भी रुख कर चुके हैं।

ट्रस्ट के महासचिव के प्रति जवाबदेह होगा CEO

बता दें कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, नियुक्त होने वाला CEO सीधे ट्रस्ट के महासचिव के प्रति जवाबदेह रहेगा। मंदिर से जुड़े प्रशासनिक, वैधानिक और वित्तीय कार्यों की जिम्मेदारी उसी के पास होगी। इसके अलावा महासचिव द्वारा समय-समय पर सौंपे गए अन्य दायित्वों का निर्वहन भी CEO को करना होगा।

CEO पद के लिए धार्मिक पात्रता भी अनिवार्य

ट्रस्ट ने इस पद के लिए धार्मिक पात्रता भी तय की है। आवेदन करने वाला व्यक्ति हिंदू, वैष्णव और भगवान श्रीराम का भक्त होना चाहिए। अगर किसी उम्मीदवार को मंदिर प्रबंधन का पूर्व अनुभव है तो उसे चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी।

दान विवाद के बाद बढ़ी CEO पद की अहमियत

राम मंदिर चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने में जुटा है। ऐसे में नए CEO की नियुक्ति को बेहद अहम माना जा रहा है। नए अधिकारी से प्रशासनिक पारदर्शिता, वित्तीय निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने की उम्मीद की जा रही है।