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Ram Mandir Trust Reshuffle: राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल, लेकिन चंपत राय का असर बरकरार? समझिए नई टीम का पूरा समीकरण

Ram Mandir Trust New Changes: राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल हुआ है। महेश भागचंदका कोषाध्यक्ष और गोविंद देव गिरि को महासचिव बनाया गया है। CEO की नियुक्ति के बाद जानिए ट्रस्ट की नई व्यवस्था में क्या बदलाव हो सकते हैं।
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Ram Mandir Trust New Changes Ram Mandir Trust Reshuffle

राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, चंपत राय फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज

Ram Mandir Trust New Changes: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए हलछठ का दिन कई मायनों में अहम रहा। ट्रस्ट ने एक ही बैठक में न सिर्फ नए सदस्यों को शामिल किया, बल्कि प्रमुख पदों की जिम्मेदारियां भी बदल दीं। सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि पूर्व महासचिव चंपत राय की वापसी नहीं हुई, जैसा कि कुछ समय से कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि, ट्रस्ट की नई संरचना को देखकर संगठन से जुड़े पुराने समीकरणों और चंपत राय की बनाई व्यवस्था की चर्चा जरूर शुरू हो गई है।

अब ट्रस्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब छह साल से जिस तरीके से राम मंदिर की व्यवस्थाएं चल रही थीं, क्या अब उसका मॉडल बदलने जा रहा है? CEO की नियुक्ति और पदाधिकारियों में फेरबदल इसी दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।

चंपत राय की वापसी नहीं, लेकिन पुराने संपर्कों की चर्चा

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौर से ही विश्व हिंदू परिषद की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ट्रस्ट के महासचिव के तौर पर चंपत राय ने लंबे समय तक संघ परिवार से जुड़े अलग-अलग संगठनों के बीच समन्वय में अहम भूमिका निभाई। चढ़ावा चोरी के मामले के बाद उन्हें महासचिव का पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद भी राम मंदिर से जुड़े संगठनात्मक मामलों में उनके प्रभाव को लेकर चर्चाएं होती रहीं। अब ट्रस्ट में शामिल किए गए नए चेहरों को भी इसी पुराने नेटवर्क के संदर्भ में देखा जा रहा है। महेश भागचंदका और मदनमोहन पाण्डेय की नियुक्ति ने इस चर्चा को और हवा दी है। हालांकि, किसी व्यक्ति को किसी दूसरे पदाधिकारी का ‘करीबी’ बताना एक राजनीतिक-संगठनात्मक आकलन है, इसे आधिकारिक संबंध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

महेश भागचंदका कोषाध्यक्ष, अशोक सिंघल से है जुड़ाव

दिल्ली के उद्योगपति महेश भागचंदका को ट्रस्ट का नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है। उनका नाम दिवंगत VHP नेता अशोक सिंघल से भी जुड़ा रहा है। वह अशोक सिंघल फाउंडेशन से जुड़े हैं और राम मंदिर से संबंधित प्रमुख आयोजनों में उनकी मौजूदगी रही है।अब उन्हें ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में आने वाले समय में ट्रस्ट के आर्थिक और प्रशासनिक कामकाज पर उनकी भूमिका अहम रहने वाली है।

गोविंद देव गिरि को मिली ज्यादा केंद्रीय भूमिका

ट्रस्ट में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक महंत गोविंद देव गिरि की जिम्मेदारी का बदलना है। वह अब तक कोषाध्यक्ष की भूमिका में थे, लेकिन उन्हें महासचिव बनाया गया है। वह चंपत राय की जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगे। इस बदलाव का एक संदेश यह भी माना जा रहा है कि ट्रस्ट के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में संत समाज की भूमिका और मजबूत हुई है। ट्रस्ट के अध्यक्ष के साथ महासचिव के पद पर भी संत समाज के प्रतिनिधि की मौजूदगी अब दिखाई देगी।

मदनमोहन पाण्डेय की भी ट्रस्ट में एंट्री

अयोध्या निवासी मदनमोहन पाण्डेय को भी ट्रस्टी बनाया गया है। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े कानूनी मामले में वह राम मंदिर पक्ष की पैरवी से जुड़े रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश सरकार में अपर महाधिवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनकी नियुक्ति से ट्रस्ट में कानूनी और मंदिर आंदोलन से जुड़े अनुभव वाले चेहरे की मौजूदगी और मजबूत हुई है।

निर्मला यादव के जरिए महिला भागीदारी का संदेश

ट्रस्ट में डा. निर्मला यादव की नियुक्ति भी खास है। शिकोहाबाद की रहने वाली निर्मला यादव विश्व हिंदू परिषद के निधि समर्पण अभियान से जुड़ी रही हैं। वह ट्रस्ट में शामिल होने वाली पहली महिला सदस्य हैं। उनकी एंट्री को महिला भागीदारी के साथ-साथ पिछड़े वर्ग की प्रतिनिधित्व की दृष्टि से भी देखा जा रहा है। इस तरह एक नियुक्ति के जरिए ट्रस्ट ने सामाजिक प्रतिनिधित्व का संदेश देने की कोशिश की है।

छह साल बाद क्यों जरूरी हुई व्यवस्था में तब्दीली?

राम मंदिर ट्रस्ट के गठन के बाद से मंदिर की व्यवस्थाएं अलग-अलग पदाधिकारियों, समितियों और अधिकारियों के जरिए संचालित होती रही हैं। लेकिन मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और कामकाज के विस्तार के साथ प्रशासनिक व्यवस्था भी पहले से कहीं ज्यादा बड़ी हो गई है। इसी बीच पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को ट्रस्ट के कामकाज में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। अब नीति बनाने और उसे जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारियों के बीच ज्यादा स्पष्ट तालमेल बनाने की कोशिश हो सकती है।
CEO के जरिए रोजमर्रा के प्रशासन, कर्मचारियों से जुड़े मामलों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, परियोजनाओं की निगरानी और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय को ज्यादा केंद्रीकृत तरीके से संचालित करने की संभावना है। हालांकि, CEO के अधिकारों की अंतिम सीमा ट्रस्ट की ओर से तय की जाएगी।

चढ़ावा चोरी विवाद के बाद बदली सोच?

राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल उठे थे। मामले की जांच में गिनती कक्ष की निगरानी, CCTV और प्रक्रियागत व्यवस्थाओं से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल सामने आए। यही वजह है कि CEO की नियुक्ति को केवल एक नई पोस्ट बनाने के तौर पर नहीं देखा जा रहा। यह ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और पेशेवर बनाने की दिशा में उठाया गया कदम भी हो सकता है।

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