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शिवपाल के इस प्लान से अखिलेश के साथ मायावती को भी होगा नुकसान

शिवपाल को इसका कितना फायदा मिलेगा यह कह पाना संभव नहीं है लेकिन उनकी हर चाल भाजपा के लिए फायदेमंद दिख रही है
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Shivpal Yadav

Shivpal Yadav

आजमगढ़. सपा से अलग होने के बाद अपने लिए राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे शिवपाल यादव लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा को बड़े झटके दे सकते हैं। इससे उबरना इन दलों के लिए आसान नहीं होगा। वैसे शिवपाल को इसका कितना फायदा मिलेगा यह कह पाना संभव नहीं है लेकिन उनकी हर चाल भाजपा के लिए फायदेमंद दिख रही है। यही वजह है कि बीजेपी प्रबंधन हर गतिविधि पर नजर गड़ाए हुए है।


बता दें कि सपा बसपा और कांग्रेस के बीच महागठबंधन की चर्चा से बीजेपी के पेशानी पर बल आ गया है। गठबंधन का जवाब देने के लिए बीजेपी के लोग हर बूथ पर कम से कम पचास प्रतिशत वोट हासिल करने के लिए कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी करने में जुटे है। पार्टी के विभिन्न आनुशंगिक संगठन भी तैयार किये जा रहे है। इसमें समाज के सभी वर्गो को जगह देने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन बीजेपी नेतृत्व भी जानता है कि उनके लिए हर बूथ पर पचास प्रतिशत वोट हासिल करना आसान नहीं है। इसलिए वे सपा बसपा का तोड़ खोजने में जुटे हैं।


वर्ष 2016 में सपा कुनबे में हुई रार का फायदा भाजपा को 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में मिला था। पार्टी 14 साल बाद अगर प्रचंड बहुमत से यूपी की सत्ता में आयी तो इसमें सपा के विवाद का बड़ा हाथ था। अब 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले शिवपाल यादव सपा से अलग होकर मोर्चे का गठन कर सभी 80 सीटों पर लड़ने का एलान कर चुके हैं। यह बीजेपी को अपने लिए काफी मुफीद मौका दिख रहा है। कारण कि शिवपाल के लड़ने से नुकसान सपा को होगा। इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा।


शिवपाल भी सपा को नुकसान पहुंचाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे है। अब तक मोर्चा केवल आजमगढ़ में सपा के आधा दर्जन बड़े नेता और हजारों कार्यकर्ताओं को मोर्चा में शामिल कर चुका है। सूत्रों की मानें तो इससे इतर मोर्चे का एक बड़ा प्लान है जिसपर वे चुनाव के समय अमल करेंगे। सूत्रों की माने तो शिवपाल यादव सपा और बसपा की गतिविधि पर पूरी तरह नजर गड़ाए हुए है। मोर्चा के लोग मानकर चल रहे हैं कि अगर यूपी में सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद के बीच गठबंधन होता है तो सपा और बसपा के हिस्से अधिकतम 30-30 सीटे आएंगी। जबकि इनके नेता हर सीट पर चुनाव लड़ना चाह रहे है।

गठबंधन के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ेगा। कुछ नेता जो हर हाल में चुनाव लड़ने के लिए तैयार है और वे पार्टी के बगावत करते हैं तो शिवपाल यादव उन सीटों पर उन्हें मौका देंगे जहां उनके पास मजबूत प्रत्याशी नहीं है। अगर ऐसा होता है तो गठबंधन की रहा मुश्किल हो जाएगी।

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