
सांकेतिक तस्वीर जांच करते अधिकारी फोटो जेनरेट AI
बहराइच जिले में भरथापुर नौका हादसे में पीड़ित परिवारों के पुनर्वास को लेकर सरकार ने तेज कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्पष्ट घोषणा कि किसी भी पीड़ित को असुरक्षित जगह पर नहीं छोड़ा जाएगा। इसके बाद प्रशासन अब नए ठिकाने के विकास में पूरी गंभीरता से जुट गया है। मोतीपुर स्थित सिंचाई कॉलोनी में प्रभावितों से मुलाकात कर मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया था कि हर परिवार को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाओं से पूरी तरह लैस रहेगा। इसी आश्वासन को जमीन पर उतारते हुए प्रशासन ने सेमरहना गांव में 1.704 हेक्टेयर भूमि को पुनर्वास के लिए अंतिम रूप से चयनित कर लिया है।
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने गुरुवार को खुद स्थल का निरीक्षण किया। राजस्व टीम को वैकल्पिक स्थलों का भी विस्तृत मूल्यांकन करने का निर्देश दिया था। शुक्रवार को सभी विकल्पों की जांच-परख के बाद सेमरहना की जमीन को सबसे उपयुक्त मानते हुए मंजूरी दे दी गई। निर्णय के तुरंत बाद भूमि के समतलीकरण और सफाई का काम शुरू हो गया। ताकि निर्माण की प्रक्रिया बिना देरी आगे बढ़ सके।
यह भूमि नानपारा–लखीमपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के पास स्थित है। जिससे आने-जाने, बाजार, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान रहेगी। प्रस्तावित कॉलोनी में पक्की सड़कें, बिजली व्यवस्था, जलापूर्ति, शौचालय, स्वच्छ पेयजल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक भवन जैसी सभी ज़रूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। हर प्रभावित परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर और भूमि का पट्टा दिया जाएगा। डीएम ने सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं कि एक माह के भीतर पूरा कार्य पूरा कर दिया जाए। सीडीओ, एसडीएम और राजस्व टीमों को निरंतर मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है।
पुनर्वास की घोषणा के बाद पीड़ित परिवारों में वर्षों बाद नई उम्मीद जगी है। सेमरहना की चयनित भूमि में जिन ग्रामीणों के पहले से घर बने हैं। उन्हें उसी स्थान पर बसाए रखने की योजना से स्थानीय लोगों में भी संतोष है। प्रशासन का लक्ष्य है कि जल्द ही सभी 118 परिवार सुरक्षित और स्थायी आवास में शिफ्ट हो सकें।
Published on:
08 Nov 2025 08:57 pm
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