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भैया घर के इकलौते कमाने वाले थे, अब हमारा क्या होगा, छोटे भाई का छलका दर्द

Lakhimpur Kheri Accident: कतर जाने से पहले जयवीर सिंह सिर्फ एक बार अपने परिवार से मिलने घर लौट रहे थे। 21 मई को नई नौकरी जॉइन करनी थी, लेकिन उससे पहले लखीमपुर खीरी के दर्दनाक हादसे ने सब छीन लिया।

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लखीमपुर खीरी हादसे में बहराइच के इंजीनियर की मौत हो गई है।

घर में खुशियों का माहौल था। 25 साल का बेटा विदेश जाने वाला था। मां-बाप पड़ोसियों-रिश्तेदारों से गर्व से कह रहे थे कि हमारा जयवीर अब कतर में नौकरी करेगा। छोटे भाई की आंखों में बड़े भाई जैसा बनने का सपना था। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि जिस बेटे को परिवार नई उड़ान के लिए विदा करने की तैयारी कर रहा है, उसकी अर्थी उठानी पड़ेगी। बहराइच के मन गोठिया गांव के रहने वाले जयवीर सिंह उन 10 लोगों में शामिल थे, जिनकी लखीमपुर खीरी सड़क हादसे (Lakhimpur Kheri Accident) में मौत हो गई।

16 मई को नौकरी से दिया था इस्तीफा

जयवीर मुंबई की एक पावर कंपनी में इंजीनियर थे। मेहनती इतने कि कम उम्र में ही परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद बन चुके थे। हाल ही में उनकी कतर में नौकरी लगी थी। अच्छी सैलरी, बेहतर भविष्य और परिवार के बेहतर दिनों का सपना लेकर उन्होंने 16 मई को मुंबई वाली नौकरी से इस्तीफा दिया था।

21 मई को थी कतर की फ्लाइट

21 मई को पुणे से उनकी कतर की फ्लाइट थी। लेकिन उससे पहले वह घर आना चाहते थे। अपने लोगों से मिलना चाहते थे। मां के हाथ का खाना खाना चाहते थे। शायद पिता के साथ कुछ देर बैठना चाहते थे। छोटे भाई के सिर पर हाथ रखकर कहना चाहते थे कि अब सब ठीक हो जाएगा…लेकिन लखीमपुर खीरी के अदलीसपुर गांव के पास एक तेज रफ्तार ट्रक ने सब खत्म कर दिया।

लखीमपुर खीरी में हुआ हादसा

सुबह करीब साढ़े सात बजे हुए उस हादसे (Lakhimpur Kheri Accident) में जयवीर की मौके पर ही मौत हो गई। परिवार तक जब खबर पहुंची, तो किसी को यकीन नहीं हुआ। जिस बेटे के विदेश जाने की तैयारी चल रही थी, उसके घर अब मातम पसरा था।

रिटायर्ड होमगार्ड पिता पेशकार सिंह के लिए यह सिर्फ बेटे की मौत नहीं, बल्कि जिंदगी भर की मेहनत और उम्मीदों का टूट जाना है। छोटे भाई प्रकाश की आवाज बार-बार भर्रा जाती है। वह सिर्फ इतना कह पा रहा है कि भैया घर के इकलौते कमाने वाले थे… अब हमारा क्या होगा?

परिवार वालों के मुताबिक, जयवीर ने जाते-जाते कई सपने देखे थे। वह कतर जाकर घर बनवाना चाहते थे। पिता को आराम देना चाहते थे। लेकिन किस्मत ने उन्हें उड़ान भरने से पहले ही रोक दिया। गांव में हर कोई यही कह रहा है कि जिस बेटे को विदेश जाते देखने का सपना था, उसे कंधा देना पड़ेगा… इससे बड़ा दुख क्या होगा?

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