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सहयोग के लिए बढ़े हाथ तो साकार हो पाया धरोहर जक्शन का सपना

आमजनों के लिए आज से समर्पित कर दिया जाएगा धरोहर जक्शनरंग रोंगन कर सजाया गया बोगी, इंजन और संग्रहालय परिसरभव्य समारोह के साथ किया जाएगा लोकार्पणपुरातत्व के मामले में जिले की बढ़ेगी ख्यातिविश्व पटल पर अंकित होगा बालाघाट जिले का नाम

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सहयोग के लिए बढ़े हाथ तो साकार हो पाया धरोहर जक्शन का सपना

सहयोग के लिए बढ़े हाथ तो साकार हो पाया धरोहर जक्शन का सपना

बालाघाट. जिले के पुरातत्व पर्यटन प्रेमियों का छह साल पुराना सपना आज 24 फरवरी को पूरा होगा। शहर के पुरातत्व संग्रहालय में बनाए गए धरोहर जक्शन को आमजनों के लिए लोकार्पित किया जाएगा। जानकारी के अनुसार धरोहर जक्शन के प्लेटफार्म के निर्माण, संग्रहालय मरम्मतीकरण के अलावा अन्य खर्चो को लेकर संग्रहालय परिवार के लिए गणमान्यों ने भी सहयोग के लिए हाथ बढ़ाए और खुलकर मदद की। परिणाम स्वरूप धरोहर जक्शन अब पूरी तरह से तैयार हो पाया है।
लोकार्पण को लेकर भी भव्य स्तर पर तैयारियां की गई है। 100 साल पुराने नैरोगेज के डीजल इंजन, बोगी के साथ ही पूरे संग्रहालय परिसर को रंग रोंगन कर आकर्षक साज सज्जा की गई है। पूरा संग्रहालय नए अंदाज में नजर आ रहा है। सुबह 11 बजे अतिथियों, डीएटीसीसी और जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में धरोहर जक्शन का भव्य लोकार्पण किया जाएगा। इसके बाद आमजनों भी यहां पहुंचकर नैरोगेज ट्रेन के इतिहास को न सिर्फ जान सकेंगे बल्कि महसूस भी कर पाएंगे।
बता दें कि बालाघाट जिले में नेरोगेज ट्रेन का काफी पुराना इतिहास रहा है। गोंदिया, बालाघाट से जबलपुर के लिए जिलेवासी इसी ट्रेन में सफर किया करते थे। कम स्पीड में चलने के कारण इस नेरोगेज ट्रेन को जिलेवासी छुक-छुक ट्रेन के नाम से भी जानते हैं। जिले के ग्रामींण अंचलों के स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थी भी इसी ट्रेन से आवागमन कर जिला मुख्यालय शिक्षा ग्रहण करने पहुंचा करते थे। इस कारण इस ट्रेन से उनकी बचपन की यादें और भावनाएं भी जुड़ी हुई हंै। कारण यहीं है कि लंबे समय से उक्त ट्रेन को धरोहर के रूप में स्थापित किए जाने की मांग की जा रही थी।
इस तरह किए गए प्रयास
संग्रहालय अध्यक्ष डॉ गहरवार ने बताया कि इसके पूर्व में नेरोगेज की बोगी की स्थापना को लेकर काफी प्रयास किए गए। तब सन 2017 में तत्कालीन कलेक्टर भरत यादव के समय संग्रहालय को नेरोगेज की बोगी 98242 रुपए में रेलवे ने प्रदान की थी। जिसे जन सहयोग से राशि एकत्रित कर संग्रहालय में स्थापित भी किया जा चुका है। इंजन को भी संग्रहालय में लाए जाने के प्रयास किए जा रहे थे। सांसद डॉ ढालसिंह बिसेन ने रेलवे से पत्र व्यवहार कर जिले को निशुल्क में इंजन की सौगात दिलवाई। वहीं वर्तमान कलेक्टर डॉ गिरीश मिश्रा ने विशेष रूचि दिखाते धरोहर जक्शन के निर्माण कार्य को पूरा करवाने में सहयोग प्रदान किया। नेरोगेज ट्रेन का इंजन संग्रहालय में स्थापित किया जा चुका है।
पुरातत्व के मामले में बढ़ेगी ख्याती
जानकारी के अनुसार 21 नवंबर 2023 को नागपुर के मोतीबाग से करीब 180 किमी. का सडक़ मार्ग का सफर तय कर नेरोगेज ट्रेन के इंजन को संग्रहालय लाया गया था। यहां 24 नवंबर 2023 को प्लेटफार्म पर दो के्रेनों और भारी जन समुदाय की उपस्थिति में इंजन को छह साल से खड़ी बोगी से जोड़ा गया। अब धरोहर जक्शन पूरी तरह से तैयार है। पुरातत्व जानकारों की माने तो बालाघाट पहला ऐसा जिला है, जहां धरोहर जक्शन का निर्माण किया गया है। वहीं संग्रहालय में एक सदी पुराने ट्रेन के इंजन को स्थापित किया गया है। धरोहर जक्शन के निर्माण से पुरातत्व के क्षेत्र में जिले की ख्याती और बढ़ेगी। वहीं विश्व पटल भी जिले का नाम अंकित होगा।
वर्सन
धरोहर जक्शन के लोकार्पण से न सिर्फ संग्रहालय और शहर का गौरव बढ़ेगा। बल्कि पुरातत्व के क्षेत्र में संग्रहालय का नाम विश्व पटल पर अंकित होगा। जिले की आगामी पीढ़ी भी जिले की 100 साल पुरानी नेरोगेज ट्रेन और उसके इतिहास को जान सकेंगी।
डॉ वीरेन्द्र ङ्क्षसह गहरवार, संग्रहालय अध्यक्ष

खास-खास-
:- तीन कलेक्टरों और जनप्रतिनिधियों ने किए प्रयास।
:- सांसद के प्रयासों से निशुल्क में मिला इंजन।
:- 20 नवंबर को इंजन लाने रवाना हुई थी टीम।
:- 23 नवंबर को बालाघाट पहुंचा था नेरोगेज इंजन।
:- 24 नवंबर को 10-10 टन की दो क्रेनों के माध्सम से किया गया था स्थापित।
:- इतिहास के पन्नों पर दर्ज होगी 24 फरवरी 24 की तारीख।
:- धरोहर जक्शन से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
:- 100 साल पुरानी धरोहर सहेजी जा सकेगी।
:- भावी पीढ़ी भी नेरोगेज के इतिहास को जान व देख सकेगी।
:- संग्रहालय के साथ जिले की बढ़ेगी ख्याती।