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Cabinet Minister Dayashankar Singh:उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में गंगा नदी के किनारे बसे गावों का निरीक्षण करने पहुंचे प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को ग्रामीणों का विरोध झेलना पड़ा। वह बैरिया क्षेत्र के बयासी गांव में गंगा नदी से हो रहे कटान को देखने पहुंचे थे, जिसके बाद ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हुए और उन्होंने मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस दौरान ग्रामीण उनकी गाड़ी को घेर कर कटान क्षेत्र में ले जाने की बात कहते रहे। वहीं, मामले में मंत्री दयाशंकर सिंह ने लोगों को आश्वासन दिया कि जल्द ही इसका निस्तारण करेंगे, लेकिन ग्रामीणों ने मौखिक नहीं लिखित रूप से आश्वासन मांगा है।
ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए उनके काफिले को रोक लिया, इसके बाद सुरक्षा कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। ग्रामीणों ने मंत्री से कहा कि प्रत्येक साल विधायक, नेता, मंत्री और अधिकारी आते हैं और उचित कार्रवाई का भरोसा देते हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है, किसी तरह से कोई ठोस कार्य आज तक नहीं किया गया। ग्रामीणों का आरोप है की गंगा के कटान के कारण खेत और मकान गंगा नदी में समाहित हो जा रहे हैं, लेकिन अब तक अस्थाई निस्तारण ही किए गए हैं। स्थाई समाधान नहीं निकाला गया है।
वहीं, विरोध कर रहे ग्रामीणों ने दयाशंकर सिंह से कहा कि मौखिक रूप से आश्वासन नहीं चाहिए। उन्होंने मंत्री से लिखित रूप में आश्वासन मांगा है। इसके साथ ही गंगा के किनारे कटान को रोकने के लिए परियोजना को भी लागू करने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रत्येक साल गंगा नदी के कारण उनके खेत और यहां तक कि उनके मकान भी नदी में समा जा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस निस्तारण नहीं किया गया है। लोग परिवार के साथ अपना सब कुछ छोड़कर दूसरे स्थान पर पलायन कर रहे हैं।
दरअसल, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह अपने विधानसभा क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे। इस दौरान वह गंगा नदी के किनारे स्थित गांव का भी निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान बयासी गांव में पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने उनका घेराव कर दिया। हालांकि, मंत्री ने ग्रामीणों से बातचीत की और पूरे नुकसान का जायजा भी लिया है। उन्होंने मौके पर पहुंचे अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीणों की समस्या को ध्यान में रखते हुए जल्दी इसका स्थाई समाधान निकाला जाए।
दरअसल, बरसात के मौसम में बैरिया तहसील के किनारे बसे कई गांव गंगा नदी की काटन की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में लोग अपने घर और जमीन से हाथ धो बैठते हैं। लंबे समय से ग्रामीण इसका स्थाई समाधान निकालने की बात जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
Updated on:
27 Jul 2026, 4:01 PM IST
Published on:
27 Jul 2026, 4:01 PM IST
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