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छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सूखे एवं कर्ज से डूबे 10 किसानों ने की आत्महत्या, पढ़ें खबर

तहसीलदार और नायब तहसीलदार की टीम की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि किसान ने कर्ज के कारण ही आत्महत्या करने का प्रायस किया था।

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बालोद. कर्ज से लदे किसान के कीटनाशक दवाई का सेवन कर आत्महत्या करने के प्रायस के मामले पर जिला प्रशासन की जांच टीम घटना के दूसरे दिन गुरुवार को किसान के घर ग्राम लाटाबोड़ पहुंची। तहसीलदार और नायब तहसीलदार की टीम की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि किसान ने कर्ज के कारण ही कीटनाशक दवाई का सेवन कर आत्महत्या करने का प्रायस किया था।

किसान के कीटनाशक सेवन मामले पर जांच की गई
जांच अधिकारी तहसीलदार ऋतुराज ने बताया इस किसान के कीटनाशक सेवन मामले पर जांच की गई है। जांच में कर्ज के कारण ही यह कदम उठाना पाया गया है। इधर जिला अस्पताल में भर्ती लाटाबोड़ के किसान बाल सिंह के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है और वह अब सब से बात कर रहा है।
जांच अधिकारी की मानें तो इस मामले की जांच तीन बिन्दुओं पर की गई है, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक कारणों पर जानकारी ली गई। इसमें किसान बाल सिंह के परिजन ने बताया 1992-93 में किसान के भाइयों के साथ बंटवारा हुआ था। जानकारी के मुताबिक किसान के दो और भाई हैं, जिनसे जमीन का बंटवारा हो चुका है।

लगातार बढ़ता गया कर्ज का बोझ

जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि बंटवारे में बाल सिंह किसान को तीन एकड़ जमीन मिली थी, जिसे बेटियों की शादी के लिए बेचा था। तीन बेटी और एक लड़के की शादी के बाद भी उस पर कर्ज था। उसके बाद फसल खराब व अन्य कारणों से बाल सिंह पर कर्ज फिर लगातर बढ़ता चला गया।
उसके बाद वह कर्ज किस तरह पटाना है की चिंता में परेशान रहने लगा। अंत में वह कीटनाशक सेवन कर आत्महत्या करने का प्रयास किया। कहा जाए कि अब जांच के बाद प्रशासन भी मान रहा है कि किसान कर्ज से लदे होने के कारण ही यह घातक कदम उठाया।

किसान की पीड़ा
किसान बाल सिंह ने कहा कर्ज ज्यादा हो गया है, चुका नहीं सकता। इस कारण मैने आत्महत्या की ठानी थी। उन्होंने कहा कीटनाशक सेवन करने का मुख्यकारण बहुत ज्यादा परेशानी बढ़ती जा रही है। शादी के बाद भी फसल के लिए धीर- धीरे लाखों रुपए का कर्ज ले लिया हूं, पर इसकी जानकारी किसी को नहीं दी। जब कर्ज पटाने का मानसिक दबाव आया, तो कीटनाशक दवाई का सेवन कर लिया।

प्रशासन के बोल
जांच अधिकारी तहसीलदार बालोद ऋतुराज ने कहा कि किसान के घर जाकर परिजन से पूछताछ की। वहीं किसान से बयान लिया गया है। जांच में पाया गया कि किसान कर्ज पटाने के मानसिक दबाव के कारण कीटनाशक दवाई का सेवन कर लिया। बंटवारे में उसे जो जमीन मिली थी उसे बच्चों की शादी के लिए बेच दिया। उसके बाद फसल के लिए कर्ज लिया है।

एक और किसान के कीटनाशक सेवन की सूचना पर हड़बड़ाया प्रशासन
गुरुवार को एक और किसान के कीटनाशक का सेवन कर आत्महत्या करने की कोशिश की सूचना पर शासन-प्रशासन दिनभर परेशान रहा, क्योंकि बुधवार को एक किसान के इसी तरह का घातक कदम उठा लिया था, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। दो दिनों में ही यह दूसरी घटना थी, पर बाद में पता चला कि आज की घटना में वह किडनी की बीमारी से परेशान था इसलिए आत्महत्या करने की ठानी थी, तो अधिकारियों को राहत मिली। गुरुवार को हुई घटना में किडनी में खराबी से परेशान होकर एक वृद्ध ने कीटनाशक दवाई का सेवन कर आत्महत्या करने का प्रायस किया। वृद्ध ने बाकायदा सोसाइड नोट भी लिखा था, जिसे उनके घर वालों ने देख लिया, पर वृद्ध ने नोट को पकड़कर फाड़ दिया। यह मामला जिला मुख्यालय से 13 किमी दूर ग्राम नेवारीकला का है, जहां 64 साल के वृद्ध जोहन लाल सोनकर पिता परस राम ने गुरुवार सुबह अपने घर पर कीटनाशक दवाई का सेवन कर लिया।

इलाज में कर दिए 4 लाख खर्च
वृद्ध जोहन ने बताया वह बीते दो साल से किडनी की बीमारी से परेशान है। एक साल के भीतर ही किडनी के इलाज में 4 लाख रुपए खर्च कर डाले हैं। इलाज भिलाई के चंदू लाल चंद्राकर अस्पताल में चल रहा है, उसके बाद भी पेट दर्द व पैरों में सूजन के कारण परेशान रहता है। उन्होंने बताया दर्द से परेशान होकर घर में रखे कीटनाशक को निकालकर उसका सेवन कर लिया। उसके पहले वह सोसाइड नोट लिखा था, जिसमें लिखा था वह अपनी किडनी की खराबी से परेशान है और अपनी मर्जी से आत्महत्या कर रहा है। जब कीटनाशक सेवन किया और उल्टी हुई तब घरवालों को जानकारी मिली तो उन्हें नमक पानी घोल पिलाकर उल्टी कराई गई और संजीवनी 108 से जिला अस्पताल लाया, जहां उनका इलाज चल रहा है।