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24 घंटे में जमीन खाली करने का नोटिस! बालोद के 15 किसान परिवारों में हड़कंप, प्रशासन के खिलाफ विरोध

Chhattisgarh Farmer Protest Balod: 15 किसान परिवारों को प्रशासन द्वारा अचानक जमीन खाली करने का नोटिस दिए जाने से माहौल गरमा गया है। मात्र 24 घंटे में बेदखली का आदेश मिलने के बाद प्रभावित किसानों में भारी नाराजगी है...
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बालोद

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Khyati Parihar

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Updated: 23 May 2026, 4:36 PM IST

Balod Farmer Eviction Notice

किसानों में हड़कंप (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Balod Farmer Eviction Notice: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में तांदुला नदी के किनारे बसे 15 किसान परिवारों को प्रशासन द्वारा अचानक जमीन खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया है। महज 24 घंटे के भीतर दिए गए इस बेदखली आदेश से प्रभावित ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है, वहीं उन्होंने जिला प्रशासन के खिलाफ खुलकर विरोध शुरू कर दिया है।

किसानों का आरोप है कि उन्हें भरोसे में लेकर पहले कोरे कागजों पर दस्तखत कराए गए और बाद में अचानक उनके घरों पर नोटिस चस्पा कर दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी नाराजगी जताते हुए इसे “प्रशासनिक आतंकवाद” करार दिया है और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

पीढ़ियों से खेती कर रहे परिवारों पर कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, तांदुला नदी तट पर पिछले कई दशकों से खेती कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे 15 किसान परिवारों को प्रशासन की ओर से जमीन खाली करने का नोटिस दिया गया है। किसानों का कहना है कि वे करीब 70 से 80 वर्षों से इस जमीन पर कृषि कार्य कर रहे हैं, लेकिन अब अचानक उन्हें यहां से हटने का आदेश दिया गया है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

बैठक के बाद उठे कई सवाल

प्रभावित किसानों, जिनमें रुपेश साहू और लोचन राम साहू शामिल हैं, ने बताया कि प्रशासन ने उन्हें पहले बैठक के लिए बुलाया था। बैठक के दौरान अधिकारियों के बीच इस बात पर सहमति भी बनी थी कि संबंधित क्षेत्र तक नदी का पानी नहीं पहुंचता, इसलिए कुछ राहत दी जा सकती है। लेकिन बाद में स्थिति बदल गई और किसानों का आरोप है कि उन्हें आश्वासन देकर कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। इसके बाद वे अपने घर भी नहीं पहुंच पाए थे कि बेदखली का नोटिस उनके घरों पर चस्पा कर दिया गया।

मामले में अब छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना भी शामिल

इस पूरे मामले में अब छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना भी शामिल हो गई है। संगठन के पदाधिकारी चंद्रभान साहू ने प्रशासन पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर शहर के प्रमुख सदर बाजार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं की जा रही है, जबकि दूसरी ओर केवल 15 गरीब किसान परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि यदि कार्रवाई करनी है तो सभी अवैध कब्जों पर समान रूप से होनी चाहिए, न कि चुनिंदा परिवारों पर।

पुनर्वास की मांग पर अड़े किसान

बेदखली नोटिस से प्रभावित किसान अपने पुनर्वास की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन नदी किनारे से उन्हें हटाना ही चाहता है तो पहले उनके लिए वैकल्पिक कृषि भूमि और पुनर्वास की व्यवस्था की जाए, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उचित व्यवस्था नहीं की जाती, वे जमीन खाली नहीं करेंगे।

IIT भिलाई सर्वे को बताया जा रहा वजह

विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिला प्रशासन और IIT भिलाई के बीच तांदुला जलाशय के संरक्षण और कायाकल्प को लेकर एक समझौता हुआ है। इसी के तहत तकनीकी टीम द्वारा क्षेत्र का ड्रोन सर्वे कराया गया था। माना जा रहा है कि इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर नदी तट के आसपास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है, जिसकी जद में ये 15 किसान परिवार आ गए हैं।

फिलहाल इस नोटिस के बाद पूरे क्षेत्र में असंतोष और तनाव की स्थिति बनी हुई है, और आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।