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पहले आर्थिक तंगी ने इंटरनेशनल स्पर्धा से बाहर कर दिया, अब योग में जीता गोल्ड मैडल

ये बच्चे योग से निरोगी काया का संदेश देते हुए योग में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर गोल्ड मैडल के साथ पूरे प्रदेश में एक नई पहचान बनाई है।
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बालोद

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Satya Narayan Shukla

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Updated: 22 Jun 2018, 10:45 AM IST

yoga in chhattisgarh

पहले आर्थिक तंगी ने स्पर्धा से बाहर कर दिया, अब जीता गोल्ड मैडल

बालोद. गुरुवार को पूरा देश अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। जहां जिले के दो ऐसे विद्यार्थी हैं जो योग के मामले में स्वास्थ्य और उपलब्धियों के लिए आदर्श बन गए हैं। ये छात्र योग को अपने जीवन से जोड़ लिए हैं। इसलिए ये बच्चे योग से निरोगी काया का संदेश देते हुए योग में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर गोल्ड मैडल के साथ पूरे प्रदेश में एक नई पहचान बनाई है। सरकार योग आयोग बनाकर हर किसी को योग से जोडऩे बढ़ावा दे रही है। पर ग्रामीण क्षेत्र का निवासी लिलेश्वर और पुष्पेंद्र जैसे बच्चे अपने दम पर पालकों के सहयोग से योग में प्रदेश का नाम देश में रौशन कर रहे हैं। इसमें गरीबी आड़े नहीं आई, क्योंकि घर से इन्हें पूरा प्रोत्साहन मिला।

पिता ने कर्ज लेकर भेजा इंटरनेशनल स्पर्धा में
ज्ञात रहे कि जिले के ग्राम सोरर निवासी दो छात्रों ने योग को अपना जीवन लक्ष्य बना लिया है। ऐसा कर वे छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में बालोद जिले का नाम रौशन किया है। नेपाल में हुए अंतरराष्ट्रीय योग प्रतियोगिता में अंडर-16 में गोल्ड मैडल व अंडर-14 में ब्रॉन्ज मैडल लाकर एक नया कीर्तिमान रचा है। इन बच्चों को नेपाल भेजने के लिए रुपए नहीं थे, तो पिता ने कर्ज लेकर इन्हें प्रोत्साहित किया और लिलेश्वर को कर्ज लेकर नेपाल भेजा, जहां बेटे ने कमाल कर दिया। उनकी उम्मीदों पर खरा उतरकर दिखा दिया।

बच्चे का लगन देख परिजन ने अर्थिक परेशानी का अहसास नहीं कराया

जिले के ग्राम सोरर के इन होनहारों ने भारत के अलावा नेपाल में हुए अंतरराष्ट्रीय योग प्रतियोगिता में गोल्ड और ब्रॉन्ज मैडल लाकर ये बात साबित कर दी कि मेहनत से इंसान सब कुछ हासिल कर सकता है। जानकारी के मुताबिक सोरर के हाई स्कूल का छात्र लिलेश्वर कुमार के घर की आर्थिक हालत अच्छी नहीं कि वो छत्तीसगढ़ के अलावा किसी देश में जाकर योग प्रतियोगिता में भाग ले सके, मगर उनके माता-पिता ने बेटे की मेहनत व लगन को देखते हुए उसे इस बात का अहसास नहीं होने दिया और संसाधन जुटाए। जब नेपाल के लिए भी लिलेश्वर के माता-पिता ने कर्ज लेकर उसे वहां भेजा। जहां उन्होंने अंडर-16 में गोल्ड मैडल लेकर बालोद जिले का नाम रौशन किया।

2017 में भी मिला था मौका, पर आर्थिक तंगी ने स्पर्धा से कर दिया था वंचित
लिलेश्वर ने बताया कि 2017 में भी उन्हें नेपाल के अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में जाने का मौका मिला था, मगर आर्थिक तंगी के कारण वो नहीं जा पाया। इस बार उसके माता-पिता ने हार नहीं मानी और कर्ज लेकर मुझे नेपाल भेजा। लिलेश्वर योग में ही अपना भविष्य बनना चाहता है। इसके लिए वह सरकार से मदद की उम्मीद करता है कि उसे आगे की स्पर्धाओं में भाग लेने के लिए शासन-प्रशासन से मदद मिले।

दोस्त भी कम नहीं, देता है पूरा साथ
दूसरी ओर इसी गांव का रहने वाला लिलेश्वर का मित्र पुष्पेंद्र ने भी नेपाल में अंडर-14 में ब्रांज मैडल लाकर ये साबित कर दिया कि लक्ष्य को अगर पाना है, तो मेहनत करें। हालातों से कमजोर पुष्पेंद्र के माता-पिता ने भी कर्ज लेकर अपने बेटे को नेपाल भेजा। पुष्पेंद्र भी योग में अपना भविष्य बनाना चाहता है।