
सपने में आए बापू तो गांव के आगे जुड़ा गांधी नाम (फोटो सोर्स- Dreamstime)
Gandhi Jayanti 2025: बालोद जिले के ग्राम गोरकापार के नाम को महात्मा गांधी के नाम से ही गांधी गोरकापार के रुप में पहचान मिली। दरअसल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे गोरकापार के वली मोहम्मद के सपने में महात्मा गांधी आए और उनसे कहा कि जेल से रिहा हो जाओगे। ये बात सच हुई और उन्होंने गांव गोरकापार के नाम के आगे गांधी जोड़ दिया, जिसके बाद से इस गांव को गांधी गोरकापार के नाम से जाना जाता है।
मिली जानकारी के मुताबिक, साल 1920-21 में ग्राम गोरकापार निवासी वली मोहम्मद गांव के पटवारी थे। उस समय यह गांव दुर्ग जिले में था। बताया जाता है कि इस गांव में भैंस गायब हो गई, जिसका पता एक व्यक्ति ने बताया। उस आदिवासी व्यक्ति ने पता बताने वाले बूढ़े व्यक्ति को धन्यवाद देने के लिए खोज शुरु की। उसी समय वली मोहम्मद की मुलाकात उक्त व्यक्ति से हुई।
वली मोहम्मद की जेब से महात्मा गांधी का फोटो गिरा, जिसे उस व्यक्ति ने देखा तो उनकी पहचान बता दी, जिसके बाद वली मोहम्मद इस बात से काफी प्रभावित हुए और महात्मा गांधी को संत मनाने लगे। इस घटना से वली मोहम्मद काफी प्रभावित हुए और पटवारी की नौकरी छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए। 24 जुलाई 1957 को वली मोहम्मद का निधन हो गया।
महात्मा गांधी से प्रभावित होकर जब स्वतंत्रता आंदोलन में आए तो उन्होंने अपना कार्य क्षेत्र डौंडीलोहारा क्षेत्र को चुना। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के लिए लोगों को एकजुट किया। उनके प्रमुख सहयोगियों में बालोद के स्व. सूरज प्रसाद वकील रहे। कुटेरा के स्व. कृष्णाराम ठाकुर और भेड़ी गांव के रामदयाल ने उनसे प्रेरणा लेकर जंगल सत्याग्रह में भाग लिया। अंग्रेजी राज के विरोध के चलते उन्हें पहली बार 7 मार्च 1923 को गिरफ्तार कर नागपुर जेल भेजा गया था। इसके बाद से वे कई बार जेल गए। अंतिम बार 1943 से 1945 तक उन्हें नागपुर जेल में रखा गया।
वली मोहम्मद को आभास हुआ कि गांव की महिला महात्मा दाई ने भी गांववालों को कहा था कि वली मोहम्मद जन्माष्टमी के दिन जेल से रिहा होंगे और यह बात भी सच हुई। जब रिहा होकर वे गोरकापार पहुंचे और महात्मा दाई से मुलाकात की। दाई ने कहा कि उन्हें सपने में आकर बापू ने बताया था। इसके बाद से आसपास गांव में मशहूर हो गया कि दाई को स्वप्न में आकर महात्मा गांधी निर्देश देते हैं। इसके बाद गांव के आगे गांधी जुड़ गया और आज भी इस गांव को गांधी गोरकापार के नाम से पहचाना जाता है।
Published on:
02 Oct 2025 02:38 pm
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