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Holi 2025: होलिका दहन से गर्भ में पल रहे बच्चे की हो जाती है मौत! 100 साल से लोगों ने नहीं मनाई होली, जानें वजह

Holi 2025: छत्तीसगढ़ में एक ऐसा भी गांव है जहां होलिका दहन करने से महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो जाती हैै। बेहद डरावनी है इस गांव की कहानी, चलिए आपको बताते हैं…

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Holi 2025, Holi Horror Story

Holi 2025: देश में गुरुवार को होलिका दहन किया जाएगा। इसके बाद शुक्रवार को यानी 14 मार्च को होली मनाई जाएगी। लेकिन छत्तीसगढ़ का एक गांव ऐसा भी है जहां होलिका दहन से यहां लोगों के चेहरों में मौत का डर छा जाता है। इससे बचने के लिए गांव के लोग करीब 100 साल से होलिका दहन नहीं कर रहे हैं। साथ ही इस खौफनाक अंजाम से बचने के लिए महिलाओं को उनके मायके ले जाया जाता है।

Holi 2025: बालोद जिला का गांव, नाम है चंदनबिरही

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम चंदनबिरही में होलिका नहीं जलाई जाती। ग्रामीणों के मुताबिक 1926 से यानी लगभग 100 साल से होलिका नहीं जलाई जा रही है। ग्रामीणों ने इसकी वजह भी बताई, उनके अनुसार फागुन के महीने में गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो जाती थी।

गांव की होली देखने पहुंचते हैं ग्रामीण

चंदन बिरही की इस खास होली को देखने व खेलने के लिए बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण भी आते हैं। हर साल होली को लेकर लोगों में गजब का उत्साह रहता है। देर से ही सही लेकिन जो परंपराएं चल रही है उसे भी गांव के लोग आज भी जिंदा रखे हुए हैं।

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राजा निहाल सिंह ने शुरू कराई रामसत्ता

ग्रामीणों को कुछ समझ नहीं आ रहा था आखिर क्यों बच्चे गर्भ में खत्म हो रहे है। तभी क्षेत्र के राजा निहाल सिंह ने इस घटना को देखा और वृंदावन गए। वहां से आने के बाद ग्रामीणों से कहा कि इन घटनाओं को रोकना है तो गांव में सात दिन का रामसत्ता का आयोजन करें, उस दिन से गांव में होलिका नहीं जलाते हैं और होली के दिन रंग-गुलाल भी नहीं खेलते हैं।

गर्भवती महिलाओं को फागुन में ले जाते थे मायके, इसके बाद ही लौटती थीं ससुराल

ग्रामीण मुंजनू साहू, भागवत राम ने बताया कि बुजुर्गों के अनुसार महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत की घटना के बाद पूरेे गांव में लोग दहशत में थे। इसके बाद लोग गर्भवती महिलाओं को उनके मायके भेज देते थे। फागुन बीतने के बाद ससुराल लौटती थीं।

चार दिन बाद खेलते हैं सामूहिक होली

ग्रामीण मुंजनू साहू ने बताया कि जब पूरे देश में होली मनाई जाती है उस दिन यहां होली नहीं खेलते। होली के चार दिन बाद गांव में रामसत्ता के छठवें दिन दही लूट का आयोजन होता है, उसी दिन सामूहिक होली खेलते हैं। इस बार 17 मार्च को दही लूट के साथ सामूहिक होली खेली जाएगी। महिला एवं पुरुष एक जगह इकट्ठे होंगे और होली खेलेंगे।