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organic rice : बाजार नहीं मिलने पर किसान ने काले, लाल और हरे चावल की जैविक खेती कर दी बंद

एक ओर सरकार जैविक कृषि को बढ़ावा देने कई योजनाएं लागू की है। जिले के कुछ किसान ऐसे भी हैं, जो जिले में पूर्ण रूप से जैविक कृषि कर काले, लाल व हरे रंग के चावल का उत्पादन कर रहे थे, लेकिन शासन व प्रशासन ने इस जैविक चावल व धान को समर्थन मूल्य या फिर उचित मूल्य पर खरीदने कोई योजना नहीं बनाई है। नतीजा किसान मयूस हैं।

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अब किसान ने लगाया एचएमटी चावल

आर्गेनिक खेती बंद कर किसान ने लगाया एचएमटी धान

बालोद. एक ओर सरकार जैविक कृषि को बढ़ावा देने कई योजनाएं लागू की है। जिले के कुछ किसान ऐसे भी हैं, जो जिले में पूर्ण रूप से जैविक कृषि कर काले, लाल व हरे रंग के चावल का उत्पादन कर रहे थे, लेकिन शासन व प्रशासन ने इस जैविक चावल व धान को समर्थन मूल्य या फिर उचित मूल्य पर खरीदने कोई योजना नहीं बनाई है। नतीजा किसान मयूस हैं। गुरुर ब्लॉक के ग्राम सनौद निवासी ध्रुव राम साहू तीन एकड़ में जैविक कृषि करते हैं। इनके उत्पादित लाल एवं काले रंग के चावल की मांग ऑस्ट्रेलिया तक थी। अब वहां उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश से चावल की सप्लाई की जा रही है। इस वजह से उनके उत्पादित चावल की सप्लाई नहीं हो रही है। अब काले, लाल व हरे रंग के चावल की खेती बंद कर दी है। तीन एकड़ में एचएमटी धान की जैविक खेती कर रहे हैं।

जैविक धान भी समर्थन मूल्य पर खरीदें
प्रगतिशील किसान ध्रुवराम साहू ने कहा कि प्रदेश में कई किसान जैविक कृषि करते हैं। छत्तीसगढ़ राज बनने के बाद भी जैविक कृषि से उत्पादित धान व चावल की उचित समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू नहीं कर पाई। सरकार चाहे तो जैविक कृषि उत्पादों के लिए अलग से बाजार खोलकर खरीदी कर सकती है। रेडराइस, ब्लैक राइस की अन्य देशों में 8 से 9 हजार रुपए क्विंटल में बिकता है। वही दाम यहां मिल जाए तो बड़ी संख्या में किसान जैविक कृषि करेंगे।

सिर्फ प्रदर्शनी तक सीमित रह गया चावल
हर साल मुख्यमंत्री के आगमन, राज्योत्सव व अन्य बड़े सरकारी कार्यक्रमों में शासन-प्रशासन जैविक कृषि की भी प्रदर्शनी लगाते हैं। जैविक कृषि की प्रशंसा होती है, लेकिन किसानों की पीड़ा नहीं समझ पाते हैं। किसानों को जैविक कृषि उत्पादों को सही दाम पर बेचने के लिए बाजार चाहिए।

समर्थन मूल्य पर खरीदने का कोई आदेश नहीं
कृषि विभाग के उपसंचालक जीएस ध्रुव ने कहा कि जैविक कृषि कर रहे किसानों के उत्पादित धान को समर्थन मूल्य पर खरीदने का कोई आदेश नहीं आया है। किसानों को जैविक कृषि के लिए प्रेरित जरूर किया जा रहा है।