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बालोद

नर्राटोला में 15वीं-16वीं शताब्दी की दुर्लभ प्रतिमाएं, ग्रामीण करते हैं पूजा, इसलिए बचीं

बालोद जिले में पुरातत्व विभाग के पास प्राचीन प्रतिमाओं व धरोहरों को सुरक्षित रखने तक का समय नहीं है। डौंडी विकासखंड के ग्राम नर्राटोला में 15वीं से 16वीं शताब्दी में पत्थरों से बनी प्रतिमाएं हैं। इन दुर्लभ प्राचीन प्रतिमाओं को सहेजने ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

बालोदMay 27, 2024 / 10:28 pm

Chandra Kishor Deshmukh

बालोद जिले में पुरातत्व विभाग के पास प्राचीन प्रतिमाओं व धरोहरों को सुरक्षित रखने तक का समय नहीं है। डौंडी विकासखंड के ग्राम नर्राटोला में 15वीं से 16वीं शताब्दी में पत्थरों से बनी प्रतिमाएं हैं। इन दुर्लभ प्राचीन प्रतिमाओं को सहेजने ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

Rare Statue बालोद जिले में पुरातत्व विभाग के पास प्राचीन प्रतिमाओं व धरोहरों को सुरक्षित रखने तक का समय नहीं है। डौंडी विकासखंड के ग्राम नर्राटोला में 15वीं से 16वीं शताब्दी में पत्थरों से बनी प्रतिमाएं हैं। इन दुर्लभ प्राचीन प्रतिमाओं को सहेजने ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अच्छी बात यह है कि इन प्राचीन प्रतिमाओं की ग्रामीण पूजा कर रहे हैं। तब कुछ प्रतिमाएं सुरक्षित हैं। ग्रामीण देखरेख नहीं करते तो प्राचीन प्रतिमाएं गायब हो जाती। ग्रामीणों की मांग के बाद भी शासन-प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।

ग्रामीणों का दावा : खुदाई के दौरान निकलती हैं प्रतिमाएं

ग्राम नर्राटोला के ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी प्रतिमाएं हैं। इसके बारे में हमें ज्यादा पता नहीं है। यह सत्य है कि इस जगह के आसपास की खुदाई करें तो पत्थरों की प्राचीन प्रतिमाएं निकलती है।
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नर्राटोला में 15वीं-16वीं शताब्दी की दुर्लभ प्रतिमाएं, ग्रामीण करते हैं पूजा, इसलिए बचीं

क्षेत्र में की जाए बाउंड्रीवॉल

ग्रामीण झाड़ू राम, बिहारी राम, ठाकुर, हिरदेराम, सुंजीत, शिव कुमार ने कहा कि इस प्राचीन प्रतिमा परिसर को ग्रामीणों देव स्थल मानकर वर्षों से पूज रहे हैं। यहां देवी, देवताओं की भी प्रतिमा है। ग्रामीणों की सिर्फ एक ही मांग है कि इस स्थल को सुरक्षित रखने बाउंड्रीवॉल का निर्माण करें, जिससे प्रतिमाएं सुरक्षित रख सके।

इन प्राचीन प्रतिमाओं की ग्रामीण पूजा कर रहे हैं। तब कुछ प्रतिमाएं सुरक्षित हैं। ग्रामीण देखरेख नहीं करते तो प्राचीन प्रतिमाएं गायब हो जाती।
इन प्राचीन प्रतिमाओं की ग्रामीण करते हैं पूजा।

शासन-प्रशासन का मौन, समझ से परे

इस स्थल के बारे में शासन-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को अच्छे तरीके से मालूम है। इनकी सुरक्षा को लेकर मौन रहना समझ से परे है। इस ओर प्रमुखता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

कई प्रतिमाएं हो गई हैं खंडित

ग्रामीणों का दावा है कि जो प्रतिमाएं हैं, वह कम है। पहले इससे अधिक प्रतिमाएं थीं। जमीन की खुदाई करने पर और प्रतिमाएं निकलती हैं। एक बार शोध किया जाए। हालांकि कई प्रतिमा ऐसी हैं, जो खंडित हो चुकी हैं।

गांव के युवा नहीं जानते प्रतिमाओं के बारे में

इस प्राचीन प्रतिमाओं को लेकर गांव के युवाओं से पूछे तो वह भी इसके बारे में नहीं बता पाते जबकि युवाओं को इनके बारे में बताने की जरूरत है। शासन व प्रशासन को हर हाल में प्रयास करने की जरूरत है नहीं तो एक भी प्रतिमाएं नहीं बचेंगी।

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