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आधी रात को मासूम बेटा बोला- पापा, पैर में दर्द हो रहा, टॉर्च जलाकर देखा तो कांप गई रूह

7 वर्षीय पुत्र का गांव में ही इलाज कराने के दौरान हो गई मौत, गांव के लोगों के जागरुक होने की है आवश्यकता

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Crying

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कुसमी. 7 वर्षीय बालक अपने माता-पिता के साथ रात में जमीन पर सो रहा था। आधी रात को वह अचानक उठ बैठा। उसने पिता से कहा कि उसके पैर में किसी चीज ने काट लिया है इसलिए दर्द हो रहा है। पिता तत्काल उठा और टॉर्च जलाकर देखा तो करैत सांप घर में ही बिल में घुस रहा था। यह देख उसकी रूह कांप गई।

सांप डसने की पुख्ता पुष्टि के बाद वह बेटे को अस्पताल ले जाने की बजाय गांव में ही झाडफ़ूंक कराने लगा। सुबह होने के बाद भी उसे अस्पताल नहीं ले जाया गया। इसी दौरान रविवार की दोपहर उसने दम तोड़ दिया। मासूम बेटे की मौत से माता-पिता सदमे में हैं।


बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोटालू निवासी 45 वर्षीय हरिनाथ अगरिया का पूरा परिवार शनिवार की रात को भोजन के बाद जमीन पर सो रहा था। इसी दौरान देर रात को हरिनाथ के 7 वर्षीय पुत्र रोशन राम के पैर में अचानक दर्द हुआ तो उसने अपने पिता को जगाया। उसने पिता से कहा कि उसके पैर में काफी तेज दर्द हो रहा है।

यह सुनकर पिता उठ बैठा और टॉर्च जलाकर इधर-उधर देखा तो घर में करैत सांप बिल में जाते दिखा। इसके बाद उसने बेटे के पैर को देखा तो सांप के डसे का निशान बना हुआ था।

यह देख उसके माता-पिता के होश उड़ गए। उन्हें रात में कुछ समझ में नहीं आया तो वे उसे अस्पताल ले जाने की बजाय आनन-फानन में गांव में ही उसका झाडफ़ूंक कराने लगे। इसी बीच रविवार की दोपहर बालक की मौत हो गई। मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है।


जागरुकता की है कमी
अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने में आता है कि सांप डसने पर पीडि़त को अस्पताल ले जाने की बजाय वे उसका झाडफ़ूंक कराने लगते हैं। उन्हें यह विश्वास होता है कि झाडफ़ूंक से पीडि़त जल्दी ठीक हो जाएगा। इस लापरवाही के कारण पीडि़त की जान चली जाती है। ऐसे कई मौके देखने को मिले है कि जब पीडि़त की मौत हो जाती है, इसके बाद भी परिजन झाडफ़ूंक से उसे जिंदा कराना चाहते हैं। हद तो तब हो जाती है जब झाडफ़ूंक करने वाला भी मृत को जिंदा करने का दावा करने लगता है।


डॉक्टरों का ये कहना
इस मामले में डॉक्टरों का कहना है कि जब भी किसी को सांप डसे तो उसे तत्काल अस्पताल ले जाएं। थोड़ी सी भी देर होने पर पीडि़त की जान जा सकती है। अस्पताल में सही समय पर एंटी स्नेक वेनम के डोसेज लगने पर पीडि़त की जान बच सकती है।

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