
बलरामपुर लोक निर्माण विभाग फोटो सोर्स विभाग
बलरामपुर के लोक निर्माण विभाग (PWD) में कर्मचारियों के रिकॉर्ड से कथित छेड़छाड़ और अवैध वसूली का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। विभागीय अभिलेखों और मानव संपदा पोर्टल पर एक कर्मचारी को मृत दिखाकर उसका वेतन रोक दिए जाने के आरोप ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है। मामले में जांच तो शुरू हो गई है। लेकिन 15 दिन बाद भी किसी जिम्मेदार कर्मचारी पर कार्रवाई न होने से नाराजगी बढ़ रही है।
बलरामपुर जिले के लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड में सामने आए एक विवाद ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि विभाग में कार्यरत मेट अनुरुद्ध प्रताप तिवारी को विभागीय रिकॉर्ड और मानव संपदा पोर्टल पर मृत दर्शा दिया गया। जिसके चलते उनका वेतन भी रोक दिया गया था। मामले की जानकारी सामने आने के बाद विभाग में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कर्मचारियों ने इसे सिर्फ तकनीकी गलती मानने से इनकार करते हुए रिकॉर्ड से जानबूझकर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद विभागीय जांच शुरू कर दी गई।
अधिशासी अभियंता कुमार शैलेंद्र ने बताया कि विभागीय रिकॉर्ड में हुई गड़बड़ी को ठीक करा दिया गया है। अनुरुद्ध प्रताप तिवारी का रुका हुआ वेतन भी जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच के लिए गठित समिति दो दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विभाग की ओर से डीडीओ सहायक के पद पर तैनात वरिष्ठ सहायक मो. शफीक से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि अब तक की कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है। उनका आरोप है कि जिस स्तर से पोर्टल पर कर्मचारी का रिकॉर्ड बदला गया। उसी स्तर से बाद में उसे सही भी कर दिया गया। जिससे जिम्मेदारी स्पष्ट दिखाई देती है।
कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि विभाग में वर्षों से जमे कुछ बाबू कर्मचारियों के रिकॉर्ड में जानबूझकर त्रुटियां डालते हैं। बाद में उन्हें ठीक कराने के नाम पर धन उगाही करते हैं। पीडब्ल्यूडी नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ ने मामले में कठोर विभागीय कार्रवाई की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, अधीक्षण अभियंता कार्यालय ने भी इस मामले को गंभीर मानते हुए अधिशासी अभियंता से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। पत्र में मानव संपदा पोर्टल पर रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और अवैध वसूली की शिकायतों का उल्लेख किया गया है।
अब विभागीय कर्मचारियों और संगठनों की निगाह जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि इतने गंभीर मामले में भी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो विभाग में फैले भ्रष्टाचार और मनमानी पर रोक लगाना मुश्किल हो जाएगा।
Updated on:
23 May 2026 09:28 am
Published on:
23 May 2026 09:24 am
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