5 नवंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Balrampur: बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अब नहीं काटने होंगे दफ्तरों के चक्कर, DM ने शुरू कराया अभियान

Balrampur News: बलरामपुर में DM डॉ. विपिन कुमार जैन ने बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए विशेष अभियान शुरू कराया है। स्कूल स्तर पर बिना प्रमाणपत्र वाले बच्चों की पहचान होगी। पात्र बालिकाओं को कन्या सुमंगला और बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ दिलाने पर भी जोर रहेगा।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बलरामपुर

•

image

Mahendra Tiwari

•

Updated: 17 Sep 2026, 4:47 PM IST

gonda news

IAS विपिन कुमार जैन फोटो सोर्स balrampur.nic.in

Balrampur News:उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया जाएगा।जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले ऐसे बच्चों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। जिनका अभी तक जन्म प्रमाणपत्र नहीं बना है। अभियान के तहत पात्र बालिकाओं को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और पात्र बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सामान्य से जोड़ने पर भी जोर रहेगा।

बलरामपुर जिले में बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए विद्यालय स्तर से अभियान चलाया जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जिले के सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की जानकारी जुटाई जाएगी। प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापक अपने विद्यालय में ऐसे छात्र-छात्राओं की सूची तैयार करेंगे। जिनका जन्म प्रमाणपत्र किसी कारण से अब तक नहीं बन पाया है। इसके बाद बच्चों के अभिभावकों से जरूरी दस्तावेज लिए जाएंगे। इन्हीं अभिलेखों के आधार पर जन्म प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

तीन काम एक साथ होंगे

इस अभियान में तीन महत्वपूर्ण काम किए जाएंगे। पहला, बच्चों का जन्म पंजीकरण कराकर प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना। दूसरा, पात्र बालिकाओं को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से जोड़ना। तीसरा, पात्र बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सामान्य का लाभ दिलाना। जन्म प्रमाणपत्र होने से बच्चों को आगे की पढ़ाई, स्कूल में प्रवेश और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा होगी।

गांवों में ग्राम पंचायत से तहसील तक कार्रवाई

ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय से प्राप्त आवेदन और दस्तावेज ग्राम पंचायत सचिव या जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार को दिए जाएंगे। जांच और सत्यापन के बाद ग्राम पंचायत सचिव प्रकरण को खंड विकास अधिकारी कार्यालय भेजेंगे। खंड विकास अधिकारी आवश्यक दस्तावेज और जांच रिपोर्ट पूरी कर प्रकरणों को संबंधित उपजिलाधिकारी के पास भेजेंगे। किसी भी स्तर पर आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं।

शहरों में नगर निकाय की जिम्मेदारी

शहरी क्षेत्रों में खंड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र विद्यालयों से आवेदन और दस्तावेज लेकर संबंधित नगर पालिका परिषद या नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी को उपलब्ध कराएंगे। जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार प्रकरणों की जांच कर रिपोर्ट और संस्तुति के साथ उपजिलाधिकारी को भेजेंगे।

RCCMS से होगी समयबद्ध कार्रवाई

जिन मामलों में विलंबित जन्म पंजीकरण के लिए सक्षम अधिकारी के आदेश की जरूरत होगी। उनमें उपजिलाधिकारी नियमानुसार RCCMS पोर्टल के माध्यम से कार्रवाई करेंगे। आदेश जारी होने के बाद संबंधित अधिकारी को इसकी प्रति दी जाएगी। इसके बाद जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार जन्म पंजीकरण कर प्रमाणपत्र जारी करेंगे।

कन्या सुमंगला योजना में 25 हजार तक सहायता

अभियान में पात्र बालिकाओं को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से जोड़ने पर भी विशेष जोर रहेगा। वित्तीय वर्ष 2024-25 से योजना की छह श्रेणियों में कुल सहायता राशि 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये की गई है।
योजना में जन्म पर 5,000 रुपये, टीकाकरण पूरा होने पर 2,000 रुपये, कक्षा एक में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा छह में प्रवेश पर 3,000 रुपये, कक्षा नौ में प्रवेश पर 5,000 रुपये और 10वीं या 12वीं के बाद उच्च शिक्षा में प्रवेश पर 7,000 रुपये की सहायता का प्रावधान है।

बाल सेवा योजना के पात्र बच्चों की भी पहचान

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सामान्य के पात्र बच्चों को भी चिन्हित कर आवेदन कराया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के आवेदन खंड विकास अधिकारी और शहरी क्षेत्रों के आवेदन संबंधित उपजिलाधिकारी के लॉग-इन पर भेजे जाएंगे। जांच के बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी के माध्यम से आगे की कार्रवाई होगी। डीएम ने विद्यालय से लेकर जिला स्तर तक सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है। अभियान के अंत में प्रधानाध्यापक को प्रमाणपत्र देना होगा कि उनके विद्यालय में कोई भी ऐसा बच्चा शेष नहीं है। जिसका नियमानुसार जन्म प्रमाणपत्र बनना बाकी हो।