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बांदा विश्व का दूसरा सबसे गर्म शहर, 48 डिग्री पहुंचा तापमान, जानें आखिर क्या है वजह

Banda Highest Temperature : उत्तर प्रदेश का बांदा बना दुनिया का दूसरा सबसे गर्म शहर; तापमान पहुंचा 48.2 डिग्री सेल्सियस। केवल 3% वन क्षेत्र और रेत खनन समेत जानें इस भीषण गर्मी के मुख्य कारण।
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बांदा

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Avaneesh Kumar Mishra

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Updated: 21 May 2026, 4:56 PM IST

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बांदा बना विश्व का दूसरा सबसे गर्म शहर, PC- Patrika

बांदा : बांदा विश्व का दूसरा सबसे गर्म शहर बन चुका है। यहां का तापमान 48 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। बांदा सिर्फ उत्तर प्रदेश या भारत का ही नहीं बल्कि इस समय दुनिया की सबसे गर्म जगहों की लिस्ट में लगातार टॉप पर बना हुआ है। इससे पहले भी यहां तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। अब आशंका जताई जा रही है कि बांदा जल्द ही 10 जून 2019 को दर्ज किए गए अपने ऑल-टाइम रिकॉर्ड (49.2 डिग्री सेल्सियस) को भी तोड़ सकता है।

बांदा (उत्तर प्रदेश) इन दिनों देश के सबसे गर्म इलाकों में शामिल है। मई 2026 में यहां तापमान लगातार 43°C से 48°C के बीच दर्ज किया जा रहा है। कई दिनों में यह 47-48°C तक पहुंच गया, जिससे बांदा देश का सबसे गर्म स्थान बन गया। न्यूनतम तापमान भी 30-32°C के आसपास रह रहा है, जिससे रातें भी असहनीय गर्म हो गई हैं।

तापमान क्यों बढ़ रहा है?

बांदा में गर्मी का यह संकट केवल मौसमी नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन और स्थानीय पर्यावरणीय क्षति का संयुक्त परिणाम है। बुंदेलखंड क्षेत्र की चट्टानी और शुष्क भौगोलिक संरचना गर्मी को तेजी से सोख लेती है और धीरे छोड़ती है। राजस्थान से आने वाली गर्म पछुआ हवाएं (लू) तापमान को और बढ़ा रही हैं। साफ आसमान के कारण सूर्य की किरणें सीधे पड़ रही हैं और नमी की कमी (ह्यूमिडिटी 10-20%) गर्मी को और तीखा बना रही है।

वन क्षेत्रफल सिर्फ 3% रह गया

बांदा धीरे-धीरे एक मानव-निर्मित हीट आइलैंड में बदल रहा है। जिले में वन क्षेत्रफल मात्र 3% रह गया है। केन नदी बेसिन में बड़े पैमाने पर रेत खनन, भूजल स्तर में भारी गिरावट, जल स्रोतों का सूखना और कंक्रीट-ईंट की बढ़ती सतहें गर्मी को फंसाए रखती हैं। कृषि भूमि पर अतिक्रमण और वनों की कटाई ने नमी बनाए रखने की प्राकृतिक क्षमता को नष्ट कर दिया है। चट्टानी इलाका दिन में तेजी से गर्म होता है और रात में गर्मी छोड़ने में देरी करता है, जिससे रातें भी गर्म रहती हैं।

जलवायु परिवर्तन का हो रहा असर

जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में गर्मी की लहरें पहले आ रही हैं, लंबी चल रही हैं और अधिक तीव्र हो गई हैं। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, अलनीनो प्रभाव और वैश्विक तापमान वृद्धि (0.7°C से अधिक) इसका प्रमुख कारण है। उत्तर प्रदेश में भी औसत तापमान बढ़ रहा है। शुष्क हवाएं, बादलों की कमी और एंटीसाइक्लोनिक परिस्थितियां गर्मी को बढ़ावा दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में भविष्य में और गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

इस भीषण गर्मी से लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। लू लगने, हीट स्ट्रोक और जल-संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने लोगों को दोपहर में बाहर न निकलने, खूब पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी है। किसान और मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

बांदा का बढ़ता तापमान एक चेतावनी है। जलवायु परिवर्तन के साथ स्थानीय स्तर पर वन संरक्षण, रेत खनन पर नियंत्रण, भूजल संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने की तत्काल जरूरत है। बिना इन उपायों के गर्मी की लहरें और तीव्र होती जाएंगी। IMD के अनुसार अगले कुछ दिनों में कुछ राहत संभव है, लेकिन लंबे समय में पर्यावरणीय संतुलन बहाल करना ही स्थायी समाधान है।