
एक माह से नहीं उठा कचरा, सड़क पर चलना मुश्किल
मंड्या. मारुतिनगर ऑटो स्टैंड व गुतल रोड के किनारे लगे कचरे के ढेर एक माह से नहीं हटने के कारण ऑटो स्टैंड पर ऑटो चालकों व गुतल रोड से गुजरने वाले लोगों को गदंगी से परेशान होना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक महीने से कचरे का डिब्बा खाली नहीं किया गया है। गुतल रोड की दीवार के किनारे भी कचरे के ढेर लगे हुए हैं। बसशणगड्डी मोहल्ला निवासी चेतन ने बताया कि कचरे के ढेर नहीं हटने से कचरा सड़ रहा है।
इससे उठ रही दुर्गंध से सड़क पर गुजरने वाले राहगीरों को नाक पर रुमाल रखकर गुजरना पड़ता है। सफाई कर्मचारी को बताने पर ही कचरा नहीं हट रहा है।
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इंसानियत के बिना जीवन मिथ्या
मैसूरु. शहर के सिटी स्थानक में डॉ समकित मुनि ने रविवार को उत्तराध्ययन सूत्र के तीसरे अध्ययन का विवेचन करते हूए कहा कि चार दुर्लभ परम अंगों में एक अंग 'मानवताÓ है। जैसे हमें स्वयं का दुख परेशान करता है, वैसे ही दूसरों की तकलीफ भी हमें परेशान करे, इसे इंसानियत कहते हंै।
मुनि ने कहा कि दूसरों को दुखी देख कर हमें पलभर भी चैन न पड़े तो किया हुआ जप, तप, पूजा, आदि सब व्यर्थ हो जाते है। अगर जीवन में मानवता नहीं, बिना इंसानियत के मानव मिथ्यात्व में रहता है।
मानवता का पहला लक्षण जीवन में अनुकम्पा होना है। अनुकम्पा समुयक्तवी जीव का पहला है। यह सम्यग्दर्शन की अभिव्यक्ति है जो दूसरों के दुख में द्रवित होता है वह दिव्यात्मा बन जाता है। जो सभी को अपने समान समझता है वह पाप से मुक्ति पा लेता है। अनुकम्पा इंसानियत आने के बाद आती है।
इंसानियत के कानों से सुनकर ही सम्यक्तव की उपलब्धि होती है। बिना इंसानियत आए जो धर्म सुनता है वह उसका दुरुपयोग ही करता है। मुनि ने ईश्वरचंद विद्यासागर के मानवता भरे जीवन पर प्रकाश डाला। इस मौके पर चेन्नई से 40 मूक-बधिर अजैन बच्चों को लेकर आई ललिता जंगड़ा ने मुनि से शाकाहार का प्रत्याख्यान दिलाया। स्वागत अध्यक्ष कैलाश चंद बोहरा ने किया।
Published on:
15 Oct 2018 05:12 pm
