
भगवान महावीर का निर्वाण मूल्यवान
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोड़वाड़ भवन में उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि ने गुरुवार को मंगलाचरण से धर्मसभा की शुरुआत की। रविन्द्र मुनि ने तीन दिवसीय मौन साधना का महामांगलिक प्रदान किया।
इससे पूर्व उन्होंने प्रवचन में कहा कि भारतीय संस्कृति में दीपावली का महत्व है। इसे जैन परंपरा में भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। जैन शासन में भगवान महावीर का निर्वाण मूल्यवान व प्रेरणादायी है। इसे बड़ी आस्था और श्रद्धा से देश भर में मनाया जाता है। उनकी अंतिम शिक्षाएं व संदेश संतों द्वारा मूल पाठ के द्वारा सुनाई जाती हैं। मुनि ने कहा कि भगवान महावीर का निर्वाण व गणधर गौतम स्वामी ने केवल ज्ञान को प्राप्त किया था।
मुनि ने कहा कि जब-जब तीर्थंकर धरती पर विद्यमान रहेंगे धन-धान्य की संपूर्णता रहेगी। जनता भी धन, धर्म-अधर्म के विवेक से संपन्न रहेगी तथा देव, गुरु, धर्म के प्रति श्रद्धा भाव रहेगा। लेकिन पृथ्वी पर तीर्थंकरों के नहीं रहने पर क्रोध, मान, माया बढ़ेंगे, धर्म घटेगा तथा अधर्म बढ़ेगा।
उन्होंने श्राविका शकुंतला जैन के सेवाभावी गुरु भक्ति के 25 वर्षों के प्रसंग पर भी प्रकाश डाला। इससे पूर्व ऋषि मुनि ने उत्तराध्ययन सूत्र के मूल पाठ को गीतिका के साथ वाचना सम्पूर्ण की। रमणीक मुनि व अन्य संतों ने भक्तामर स्तोत्र तथा भगवान महावीर चालीसा के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं को सामूहिक स्तुति करवाई। पारस मुनि ने मांगलिक प्रदान की। चिकपेट शाखा के महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने बताया कि धर्म सभा में आध्यात्मिक चातुर्मास के मुख्य संयोजक व चेयरमैन रणजीतमल कानूंगा, शांतिलाल लोढ़ा, बाबूलाल रांका, अशोक रांका, राजेन्द्र कोठारी, रिखब लोढ़ा सहित शहर के विभिन्न उपनगरीय संघों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। गुरुवार को गौतम स्वामी के महामंगलकारी 28 दिवसीय जाप की पूर्णाहुति व मंगल कलश बोली के माध्यम से प्रदान किया गया। उन्होंने चातुर्मास के 22 नवम्बर के संपन्न व अगले दिन संतों के विहार कार्यक्रम पर भी प्रकाश डाला।
Updated on:
09 Nov 2018 05:25 pm
Published on:
09 Nov 2018 05:25 pm
