
परहित करने वाले मानव का महत्व
चामराजनगर. गुंडलपेट स्थानक में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए साध्वी साक्षी ज्योति ने कहा कि फूल का महत्व तभी है जब वह अपनी सुगंध से पूरे गुलशन को महका दे।
उसी मानव का महत्व है जो अपने सद्कार्यों, साधना से अपना एवं दूसरों का कल्याण करें। आज जो गुजरात में जैन धर्म का दिव्य प्रकाश है वह सब आचार्य हेमचंद की देन है।
जैन धर्म के सिद्धांतों व महावीर की दिव्य वाणी की प्रभावना में सबसे ज्यादा योगदान इस महामानव का ही है। आचार्य हेमचंद ने न केवल अपना बल्कि जन-जन का कल्याण किया। संचालन आनन्द गन्ना ने किया।
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जीव का स्वभाव है ऊपर की ओर उठना
बेंगलूरु. जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में महावीर धर्मशाला में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए जयधुरंधर मुनि ने कहा कि जिस तरह घर अलग होता है और उसमे रहने वाले लोग अलग होते हैं, म्यान और तलवार दोनों पृथक-पृथक होते हैं।
उसी प्रकार आत्मा और शरीर भी भिन्न है। अन्यत्व भावना के द्वारा साधक पराई अमानत में खयानत की बुद्धि नहीं रखता और वस्तु, धन, घर आदि को पराया मानता है।
गर्म दूध में नींबू के रस से दूध और पानी अलग-अलग हो जाते हैं। यह भावना आत्मा की शरीर के प्रति आसक्ति को कम कर देती है।
Published on:
21 Nov 2018 05:23 pm
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