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कर्मों को भोगना बहुत कठिन

हनुमंतनगर जैन स्थानक में साध्वी सुप्रिया ने 'भूलकर भी न करें कषायों की कमाई' विषय पर कहा
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कर्मों को भोगना बहुत कठिन

बेंगलूरु. हनुमंतनगर जैन स्थानक में साध्वी सुप्रिया ने 'भूलकर भी न करें कषायों की कमाईÓ विषय पर कहा कि कर्म बांधना सरल है, पर कर्मों को भोगना बहुत कठिन व दुखदायी है। उन्होंने कहा कि साधक सदैव सत्कर्म करते हुए धर्माराधना, सेवा, दान, परोपकार करते हुए अनमोल मानव जीवन को सार्थक बनाएं। अपनी आत्मा ही कर्ता और भोक्ता है। आत्मा ही सुख-दुख देने वाली है। श्रेष्ठ अच्छी प्रवृत्तियों में लगी आत्मा अपनी मित्र है।

अशुभ व गलत प्रवृत्तियों में लगी आत्मा ही अपनी शत्रु है। प्रारंभ में साध्वी सुविधि, साध्वी सुदीप्ति ने गीतिका के माध्यम से भाव व्यक्त किए। संघ अध्यक्ष हुक्मीचंद कांकरिया के मंगलवार को 12 उपवास की तपस्या मौन के साथ गतिमान रही। संचालन उपाध्यक्ष अशोक कुमार गादिया ने किया।

हिंसा विष, अहिंसा अमृत
बेंगलूरु. राजाजीनगर में साध्वी संयमलता ने कहा कि हिंसा मृत्यु और अहिंसा जीवन है। हिंसा विष है और अहिंसा अमृत है। उन्होंने कहा कि अहिंसा का अभाव जगत में महाप्रलय उपस्थित कर सकता है। अहिंसा के बिना ना नैतिकता जीवित रह सकती है और ना ही आध्यात्मिकता। साध्वी कमलप्रज्ञा ने कहा कि सब कुछ पाने के लिए सब कुछ त्याग करना पड़ता है। देना ही ले जाने का सरल मार्ग है। सभा में हैदरबाद, पुणे, मुंबई से आए श्रद्धालुओं ने प्रवचन का लाभ लिया।


भगवान महावीर ने दिए जन कल्याण के सिद्धांत
बेंगलूरु. जयपरिसर महावीर धर्मशाला में जयधुरंधर मुनि ने कहा कि भगवान महावीर ने सत्य का साक्षात्कार करने के बाद जन-जन के कल्याण के लिए अनेक सिद्धांत प्रारूपित किए। उन्होंने कहा कि सूक्ष्मता, चिंतन की गहराई एवं दीर्घ दृष्टिकोण से युक्त इन सिद्धांतों को अपनाने से विश्व की समस्त समस्याओं का स्वत: समाधान प्राप्त हो जाता है। अहिंसा के सिद्धांत से आतंकवाद को समूल उखाड़ा जा सकता है। पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। संघ अध्यक्ष मीठालाल मकाणा ने बताया कि सभा में रणजीतमल कानूंगा, शांतिलाल लोढ़ा, चेनराज गोटावत आदि उपस्थित थे।

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