
कर्नाटक में एकजुट विपक्ष ने दी भाजपा सरकार को पटखनी, विधेयक नामंजूर
बेंगलूरु . विधानमंडल के उच्च सदन में एकजुट विपक्ष ने शनिवार को सरकार को पटखनी दे दी। सदन में सत्तारुढ़ भाजपा का बहुमत नहीं होने और विपक्ष के विरोध में होने के कारण विधान परिषद में औद्योगिक विवाद निपटारा कानून में संशोधन से जुड़ा विधेयक नामंजूर हो गया। एक दिन पहले ही विधेयक को विधानसभा में मंजूरी मिली थी। परिषद में विधेयक के खारिज होने से भाजपा को राजनीतिक झटका लगा है। भूमि सुधार कानून पर सरकार का साथ देने वाले जद-एस के इस विधेयक पर परिषद में साथ छोडऩे के कारण सरकार के लिए असहज स्थिति बन गई। इस विधेयक में 300 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को बिना सरकार की अनुमति के छंटनी की छूट के साथ अतिरिक्त कार्य की अवधि बढ़ाने के प्रस्ताव हैं। विधेयक के पक्ष में सिर्फ 14 सदस्यों ने मतदान किया जबकि विरोध 26 सदस्यों ने मतदान किया। भाजपा के कुछ सदस्यों ने भी विधेयक का विरोध किया।
सदन में विधेयक पेश करते हुए श्रम मंत्री शिवराम हेब्बार ने इस के लाभों को रेखांकित करते हुए सदस्यों से समर्थन की अपील की लेकिन विपक्षी सदस्यों ने इस श्रमिक विरोध करार देते हुए विरोध किया। विपक्षी सदस्यों के साथ ही भाजपा के आयनूर मंजूनाथ ने भी विरोध किया। विपक्ष के नेता एसआर पाटिल ने सरकार से विधेयक को वापस लेने या संयुक्त प्रवर समिति में भेजने की मांग की। लेकिन, सरकार विपक्ष की मांग से सहमत नहीं हुई। इसके बाद विपक्ष ने विधेयक पर मतदान कराने की मांग की।
विपक्ष के मुख्य सचेतक एन नारायणस्वामी ने विधेयक की प्रति फाड़ते हुए मतदान की मांग की। एकजुट विपक्ष के सामने सरकार के पास मतदान की मांग को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। मतदान में विपक्ष में अधिक मत होने के कारण विधेयक खारिज हो गया। बाद में सदन के नेता और देवस्थानम मंत्री कोटा श्रीनिवास पुजारी ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि सदन में एकजुटता से बहुमत होने के कारण विधेयक के खिलाफ मतदान कर विपक्ष ने गलत नजीर पेश किया है।
Published on:
27 Sept 2020 01:22 am
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