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आकांक्षा में नहीं, आवश्यकता में जिएं

जहां आकांक्षाएं हैं वहां समस्याएं भी हैं

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आकांक्षा में नहीं, आवश्यकता में जिएं

बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर में आयोजित धर्मसभा में साध्वी संयमलता ने कहा कि जीवन है तो समस्याएं भी हैं। सम्पन्न हो या अभावग्रस्त, राजा हो या रंक- सभी समस्याओं से घिरे हैं। जहां आकांक्षाएं हैं वहां समस्याएं भी हैं। आकांक्षओं पर ब्रेक लगाना है तो जोडऩे के साथ-साथ छोडऩे की भी आदत बनाओ। आकांक्षा में नहीं, आवश्यकता में जियो।

साध्वी ने कहा कि व्यक्ति के कर्म उत्थान और पतन के मार्ग प्रशस्त करवाते हैं। हमें पाप कर्मों से बचना चाहिए। पुण्य उपार्जन के लिए जप-अनुष्ठान व साधना करना अनिवार्य है। साध्वी कमलप्रभा ने कहा कि जिसने खोजा है उसी ने पाया है। जिंदगी के असली मोती गहराई में मिलते हैं। जो इस डर से कि डूब जाऊंगा, किनारे पर ही बैठा रहता है, वह कुछ नहीं पा सकता। गुरुवार को भक्तामर स्तोत्र के 45वें श्लोक का अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। सरला दुग्गड़ ने 13 उपवास, मनीष कुकड़ा ने 5 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। दोपहर में महिला शिविर का आयोजन हुआ।

अहंकार को मारा तो तिर गए
बेंगलूरु. वीवीपुरम संभवनाथ जैन भवन में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में आचार्य जिनसुंदर सूरीश्वर ने अहंकार के बारे में विस्तृत बात रखी। उन्होंने कहा कि मैं सर्वोच्च पद पर अहंकार, मैं सुंदर अहंकार, मेरी बड़ी कोठी, मेरी बड़ी गाड़ी इन सब चीजों का जनक अहंकार है। मैं किसी से कम नहीं हूं, यह अहंकार बोलता है। उन्होंने कहा कि अहम नर से नारायण नहीं बना देगा। यह नरक का द्वार खोल देगा। अहंकार को मारोगे तो तिर जाओगे और अहंकार को मान के बैठोगे तो मर जाओगे।

दुर्लभ है मनुष्य भव की प्राप्ति
बेंगलूरु. नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर ट्रस्ट की ओर से लुनिया भवन में आगम उत्तराध्ययन सूत्र पर व्याख्यान चल रहा है। आचार्य नयचन्द्रसागर ने बुधवार को व्याख्यान में बताया कि जीव को मनुष्य भव की प्राप्ति अति पुरुषार्थ के बाद प्राप्त होती है। मनुष्य भव प्राप्त करना दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि मानव यदि सही राह पर चले तो वह अपना जीवन देव के जैसा भी जी सकता है।