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तेजस के नौसना संस्करण ने भरी 20 से अधिक उड़ानें

एक महीने पहले पुनर्जीवित हुई परियोजना पिछले वर्ष खारिज करने वाली नौसेना भी कर रही सहयोग
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तेजस के नौसना संस्करण ने भरी 20 से अधिक उड़ानें

बेंगलूरु. स्वदेशी तकनीक से विकसित हल्के युद्धक विमान (एलसीए) तेजस का नौसेना संस्करण फिर से परीक्षण उड़ान भरने लगा है और इसे भारतीय नौसेना का सहयोग भी मिल रहा है। पिछले ही वर्ष इस युद्धक को भारी-भरकम बताकर नौसेना ने खारिज कर दिया था और कहा था कि तेजस-नौसेना को समुद्री जहाज से हथियारों के साथ उड़ान भरने में दिक्कत है।

हालांकि, पिछले 23 जुलाई को नौसेना-तेजस (एनपी-2) ने फिर से उड़ान भरी और एक महीने के भीतर 20 से अधिक परीक्षण उड़ान पूरे कर लिए। तेजस का विकास करने वाली वैमानिकी विकास एजेंसी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार तेजस-नौसेना ने पिछले 23 जुलाई से 21 अगस्त के बीच 22 परीक्षण उड़ानें भरी और इस दौरान कई मानदंडों पर उसे परखा गया।

तेजस-नौसेना की 23 जुलाई से पहले 55 उड़ानें हो चुकी थीं और अब वह 78 से अधिक सफल उड़ानें पूरी कर चुका है। एक महीने पहले ही इस परियोजना के पुनर्जीवित होने के बाद भारतीय-नौसेना ने पूरा सहयोग दे रही है। इस एक महीने के दौरान ही इस परियोजना को कुछ अहम सफलताएं भी मिली है। विशेष रूप से अरेस्टर हुक प्रणाली ने शानदार काम किया है। गोवा में आईएनएस हंसा तटीय परीक्षण केंद्र पर इस प्रणाली को परखा गया जिसमें यह सौ फीसदी कामयाब साबित हुई है। यह कामयाबी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्व के कुछ चुनिंदा देशों ने ही युद्धक विमानों की समुद्री जहाज पर लैंडिंग क्षमता विकसित की है जिनमें अमरीका, यूरोप, रुस और चीन शामिल है।

हालांकि, तेजस-नौसेना परियोजना वर्ष 2003 में ही शुरु हुई थी और पहले प्रोटोटाइप एनपी-1 की पहली उड़ान 2012 एवं दूसरे प्रोटोटाइप एनपी-2 की पहली उड़ान वर्ष 2015 में हुई लेकिन पिछले वर्ष इस परियोजना को खारिज कर दिया गया। तेजस एनपी-2 सिंगल सीटर युद्धक है जबकि एनपी-1 दो सीटों वाला ट्रेनर एयरक्राफ्ट है।

नौसेना सूत्रों का कहना है कि वे इस परियोजना को सौ फीसदी अपना समर्थन दे रहे हैं। नौसेना को युद्धक विमानों की जरूरत है। वर्ष 2019 के अंत तक आईएनएस विक्रांत का समुद्री ट्रायल शुरू हो जाएगा और उसके दो साल बाद उसे बेड़े में शामिल कर लिया जाएगा। नौसेना उस पर युद्धकों को तैनात करेगी और चाहती है और इसके लिए तेजस तैयार रहे।

हालांकि, नौसेना अधिकारियों का कहना है कि तेजस-नौसेना वर्तमान प्रोटोटाइप में जरूरतें पूरी नहीं कर पाएगा। अभी उसमें काफी बदलाव की आवश्यकता है। यह उतना ताकतवर नहीं है जितने की आवश्यकता है। हथियारों के साथ इसके सफल उड़ान भरने और फिर लैंड करने से जुड़े कई ज्वलंत सवाल भी हैं। फिर भी नौसेना इस परियोजना को पूरा सहयोग देगी।

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