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सिद्धरामय्या सबसे ज्यादा समय राज करने वाले दूसरे मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने पिछले डेढ़ दशक में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का कीर्तिमान बनाया है

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CM Siddaramaiah

बेंगलूरु. मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने पिछले डेढ़ दशक में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का कीर्तिमान बनाया है। उनसे पहले देवराज अर्स 7 जनवरी 1980 तक 5 साल 286 दिन तक मुख्यमंत्री रहे थे। अर्स के बाद हालांकि आर. गुंडुराव, वीरप्पा मोइली, एस. बंगारप्पा, रामकृष्ण हेगड़े, एस.आर. बोम्मई, वीरेंद्र पाटिल, एच.डी. देवेगौड़ा, जेएच पटेल, एसएम कृष्णा, धर्म सिंह, एचडी कुमारस्वामी, बीएस येड्डियूरप्पा, डीवी सदानंद गौड़ा तथा जगदीश शेट्टर भी मुख्यमंत्री बने लेकिन उनमें से कोई भी नेता पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका।


अर्स के बाद केवल एसएम कृष्णा ही 4 साल 230 दिन तक मुख्यमंत्री रहे। उनके पास पूरे पांच साल तक शासन करने का अवसर था लेकिन उन्होंने समय से पहले ही विधानसभा भंग कर चुनाव का सामना किया लेकिन दोबारा सत्ता में नहीं आ सके। कृष्णा का रिकार्ड तोड़ते हुए सिद्धरामय्या शुक्रवार को चार साल 231 दिन तक शासन कर चुके हैं और अब भी 28 मई 2018 तक उनके पास मुख्यमंत्री बने रहने का अवसर है। यदि वे ऐसा कर सके तो वे पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले दूसरे मुख्यमंत्री होंगे।


दूसरी बात यह है कि देवेगौड़ा व सिद्धरामय्या दोनों ही मैसूरु जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं। कृष्णा ने मुख्यमंत्री के पद पर 4 साल 230 दिन, आर. गुंडुराव ने 2 साल 239 दिन, रामकृष्ण हेगड़े ने तीन कार्यकाल में 8 साल तक शासन भले किया लेकिन वे लगातार 5 साल तक पद पर नहीं रह पाए। एस.आर.बोम्मई ने 281 दिन, वीरेन्द्र पाटिल ने 314 दिन, एस. बंगारप्पा ने 2 साल 33 दिन, वीरप्पा मोइली ने 2 साल 22 दिन तक मुख्यमंत्री के पद पर काम किया।


देवेगौड़ा 1 साल 172 दिन, जेएच पटेल तीन साल 129 दिन, कृष्णा 4 साल 230 दिन, धर्म सिंह एक साल 245 दिन, कुमारस्वामी 1 साल 253 दिन, येड्डियूरप्पा पहली बार मात्र 7 दिन, दूसरी बार 3 साल 62 दिन तक ही मुख्यमंत्री के पद पर रहे।

सावधानी से बोलें सीएम: देवेगौड़ा
जनता दल (ध) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एचडी देवेगौड़ा ने मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या से प्रदेश के सिंचाई के मसलों पर सावधानीपूर्वक बोलने को कहा है। देवेगौड़ा ने शुक्रवार को कहा कि उनको बयानबाजी बंद कर वरिष्ठ नेताओं से सलाह करना चाहिए। सबसे पहले उनको कर्नाटक की जल परियोजनाओं को समझना होगा। बयान देना आसान होता है पर क्रियान्वयन करना कठिन होता है।


देवेगौड़ा ने कहा कि मैंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राज्य के लिए संघर्ष किया है और प्रदेश की जमीन, जल व अन्य विवादों की बात आने पर कभी समझौता नहीं किया। देवेगौड़ा ने कहा कि महादयी नदी जल बंटवारा विवाद को हल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बैठक करने को भी तैयार हैं।