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यह भाजपा के खिलाफ धर्मनिरपेक्ष मोर्चे की शुरुआत है : मोइली

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष ताकतें उभरेंगी और मोदी को जाना होगा

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यह भाजपा के खिलाफ धर्मनिरपेक्ष मोर्चे की शुरुआत है : मोइली

एनडीए के पतन की उल्टी गिनती शुरू
राजनीतिक शक्तियों का एकीकरण देश के लिए अच्छा संकेत
बेंगलूरु. वरिष्ठ कांग्रेस नेता एम. वीरप्पा मोइली ने कहा कि एचडी कुमारस्वामी का राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेना भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ देश में एक धर्मनिरपेक्ष मोर्चे के गठन का संकेत होगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी नेताओं का जमावड़ा वास्तव ऐसे मोर्चे के गठन की पहली बैठक होगी। सभी विपक्षी नेता जो पहले कभी एक-दूसरे के साथ नहीं आए पहली बार इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह भाजपा विरोधी धर्म निरपेक्ष मोर्चे के गठन का सकारात्मक संकेत है। राज्य में कांग्रेस-जद (ध) का साथ आना मील का पत्थर साबित होगा और यह राजनीतिक शक्तियों के एकीकरण की अच्छी शुरुआत है।

मोइली ने कहा कि यह एनडीए के पतन की शुरुआत है, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की। यह विपक्ष की एकजुटता और धर्मनिरपेक्षता के युग की शुरुआत है। गुजरात के बाद कर्नाटक में कहीं भी मोदी लहर नहीं नजर आया।

उन्होंने कहा कि अगर राज्य में मोदी की लहर होती तो जो आंकड़ा दिख रहा है वह आंकड़ा ऐसा नहीं होता। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा को जितने प्रतिशत मत मिले हैं, वर्ष 2008 में भी वहीं मिले। इससे यह साबित होता है कि मोदी का कोई प्रभाव नहीं रहा। यहां मोदी का कोई औचित्य नहीं रहा। अब आगे किसी भी राज्य में होने वाले चुनावों बराबरी का मुकाबला होगा, क्योंकि मोदी लहर नहीं रहेगा। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष ताकतें उभरेंगी और मोदी को जाना होगा।


उठ रही है भाजपा के विरोध की लहर
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का उम्मीदवार कौन होगा इन तमाम मुद्दों पर चर्चा होगी और कहीं कोई परेशानी या कठिनाई आने का सवाल नहीं है। जिस तरह भाजपा विरोध की लहर उठ रही है उसे रोकना मुश्किल होगा और लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष गठबंधन उभरेगा।


गठबंधन की आलोचना को नकारा
कांग्रेस-जद (ध) गठबंधन को अपवित्र बताए जाने पर पलटवार करते हुए मोइली ने कहा कि उन्होंने भी पहले जनता दल (ध) के साथ हाथ मिलाया था तो क्या वह अपवित्र था। जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तब 24 पार्टियों का गठबंधन था। क्या वह अपवित्र था?