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सत्य प्राप्ति के लिए स्वदर्शन की राह पर चलें

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष विमल कटारिया ने मुनि के दर्शन कर आशीर्वाद लिए

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सत्य प्राप्ति के लिए स्वदर्शन की राह पर चलें

बेंगलूरु. यशवंतपुर तेरापंथ भवन में मुनि रणजीत कुमार ने अध्यात्म सप्ताह के अंगर्तत प्रवचन में कहा कि स्वयं द्वारा स्वयं को देखना कठिन है। यदि सत्य को प्राप्त करना है तो स्वदर्शन की राह पर चलना होगा। सत्य का साक्षात्कार तभी होता है जब स्वदर्शन का अभ्यास करें। उन्होंने कहा कि जब तक हम स्वयं द्वारा स्वयं की प्रेक्षा नहीं करेंगे तब तक स्वदर्शन संभव नहीं है। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष विमल कटारिया ने मुनि के दर्शन कर आशीर्वाद लिए। तेरापंथ सभा के संगठन मंत्री महावीर ओस्तवाल ने स्वागत किया। कटारिया ने कहा कि बेंगलूरु का जैन तेरापंथ समाज संगठित है और हर दृष्टि से सक्षम है। सभा अध्यक्ष प्रकाश बाबेल, मंत्री गौतम मुथा,किशोर मंडल प्रभारी विशाल पितलिया आदि उपस्थित थे।


विरोधी भी करते हैं मित्रवत व्यवहार
हिरियूर (चित्रदुर्गा). राजेंद्र भवन में आचार्य कीर्तिप्रभ सूरीश्वर की निश्रा में मुनि संयमप्रभ विजय ने 16वें तीर्थंकर शांतिनाथ के समवसरण की बनावट और शास्त्र सम्मत का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि बाणव्यंतर देवों के इंद्र बड़े ही मजबूती से रजत से समवसरण की नींव का निर्माण करते हैं। नीचे की मंजिल का निर्माण भवनपति देवों के इंद्र बड़े ही चातुर्य से सोने से निर्मित करते हैं। ऊपर की मंजिल का निर्माण ज्योतिष देवों के इंद्र और उसके ऊपर के मंजिल का निर्माण वैमानिक देवों के इंद्र करते हैं। इसमें मनुष्य, तिर्यच और देव तीनों ही वर्ग से सामूहिक सम्मिलित होते हैं। घोर विरोधी भी अपना वैर विस्मृत कर देते हैं और मित्रवत व्यवहार करने लगे हैं। पूरी व्यवस्था देवों द्वारा होती है और अपनी भाषा में वे अर्ध मागधी भाषा समझ जाते हैं। मुनि तपप्रभ विजय ने संगीत प्रस्तुति से सभी को भाव विभोर कर दिया।

गुरु भगवंत ही बताते हैं मोक्ष मार्ग
मैसूरु. सुमतिनाथ जैन संघ के महावीर भवन में जैनाचार्य रत्नसेन सूरीश्वर ने सिंदूर प्रकरण ग्रंथ पर कहा कि तीर्थंकर परमात्मा के विरह में दीर्घकाल तक परमात्मा के बताए हुए मोक्ष मार्ग को गुरु भगवंत ही बताते हैं। अपेक्षा से कह सकते हैं कि साक्षात तीर्थंकर परमात्मा के आलंबन से जितनी आत्माएं मोक्ष में जाती हैं उससे भी अधिक आत्माएं परमात्मा द्वारा स्थापित तीर्थ के आलंबन से जाती हैं। भूतकाल में हुए तीर्थंकर परमात्माओं के पवित्र चरित्रों को पढ़ें।