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Wheat MSP Price : एमएसपी पर गेहूं बेचने से डर रहे हैं बांसवाड़ा के किसान, जानें क्या है वजह?

Wheat MSP Price : बांसवाड़ा में सरकारी केंद्रों पर आज शुक्रवार से गेहूं की एमएसपी मूल्य पर खरीद शुरू हो गई है। पर किसान चिंतित हैं कहीं एफसीआई, गेहूं को जांच में फेल नहीं कर दे। इस वजह से किसान व्यापारियों को गेहूं बेच रहे हैं। पर यहां उनको गेहूं का दाम कम मिल रहा है।

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Banswara farmers are afraid to sell wheat at MSP Know what is reason

बांसवाड़ा. गेहूं कटाने के बाद बेचने की तैयारी में जुटा किसान। फोटो पत्रिका

Wheat MSP Price : बांसवाड़ा में सरकारी केंद्रों पर शुक्रवार से गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद होनी है। लेकिन वागड़ क्षेत्र में पिछले कुछ साल से गेहूं की गुणवत्ता कमजोर हो रही है, जो किसानों को परेशान कर रही है। विगत साल की तरह इस बार भी गेहूं का दाना पतला होने से किसानों को चिंता सता रही है कि एफसीआई गेहूं को जांच में फेल नहीं कर दे, इसलिए वे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं को बेचने के लिए खरीद केंद्रों पर जाने से डर रहे है।

दूसरी ओर व्यापारी भी गेहूं की कमजोर गुणवत्ता बताकर उन्हें उचित भाव नहीं दे रहे हैं। किसानों का आरोप है कि समस्या को लेकर अवगत कराने के बावजूद सरकार की उपेक्षा के चलते किसान नुकसान झेल रहा है और किसान औने-पौने दामों में फसल को बेच रहा है।

नहर में पानी छोड़ने पर बुवाई करते हैं किसान

किसानों का कहना है कि वे नहर का पानी छोड़ने पर हर साल तीन नवंबर से दस नवंबर के बीच बुवाई करते हैं। पूर्व में भी माही से जल प्रवाह पर ही किसान बुवाई करते आए हैं, लेकिन विगत तीन-चार साल से किसानों के उत्पादन में गुणवत्ता की कमजोर आई है, जिससे उन्हें मंडी में उसका भाव नहीं मिल रहा है।

किसानों का आरोप है कि गेहूं की गुणवत्ता की समस्या को लेकर उन्होंने विगत साल व इस साल कृषि अनुसंधान केंद्र को इस बारे में बताया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला।

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करे सरकार

कृषि अनुसंधान केंद्र को हमने गेहूं की गुणवत्ता कमजोर होने की शिकायत की थी, लेकिन हमें कोई सहायता नहीं मिली। इस बार पूरे जिले में गेहूं के दाने की गुणवत्ता पतली है। एफसीआई पर यह गेहूं क्वालिटी जांच में फेल हो सकता है।

इसे लेकर हमने जिला कलक्टर के माध्यम से सरकार को ज्ञापन दिया है कि स्थानीय गेहूं को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। यदि हमारी समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो किसान कलक्ट्रेट का घेराव करेंगे।
रणछोड़ पाटीदार, प्रांतीय उपाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ

तापमान में बढोत्तरी का आ रहा असर

कृषि अनुसंधान केंद्र का कहना है कि लगातार कुछ साल से तापमान में चल रही बढ़ोत्तरी के चलते उत्पादन प्रभावित हो रहा है। समय पर बुवाई करते हैं तो गुणवत्ता ठीक रहती है, लेकिन समय पर बुवाई नहीं करने से गुणवत्ता पर असर आ रहा है।

इसके अलावा बुवाई के बाद 18 से 22 दिन के बीच सिंचाई को पानी लगना चाहिए। इसके अलावा जब के दाने की अवस्था दूधिया हो तो पानी लगाना आवश्यक होता है। सिंचाई समय पर नहीं होती है तो गुणवत्ता एवं उत्पादन में फर्क आता है।

गेहूं के उत्पादन पर एक नजर

साल - बुवाई (हैक्टेयर में) - उत्पादन (मीट्रिक टन में)
2022-23 - 1,26,465 - 3,52,331
2023-24 - 1,08,682 - 3,27,271
2024-25 - 1,20249 - 3,60,717

तापमान में बढ़ोतरी से गेहूं उत्पादन प्रभावित

कुछ साल से यहां के तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यहां गेहूं का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। समय पर बुवाई हो और सिंचाई हो जाए तो गुणवत्ता ठीक रहती है। हम समय-समय पर किसानों को जागरूक करते हैं।
डॉ. हरगिलास मीणा, संभागीय निदेशक, कृषि अनुसंधान केंद्र

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