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बांसवाड़ा के किसान फिर मायूस, बीमा योजना बनी घाटे का सौदा, किसानों ने कहा- 80-90% तक फसल बर्बाद हो गई

बांसवाड़ा में इस साल रिकॉर्ड बारिश से करोड़ों की फसलें चौपट हो गईं। 46,739 किसानों ने फसल बीमा कराया, 10 करोड़ प्रीमियम जमा हुआ। लेकिन क्लेम में सिर्फ 7 करोड़ मिले। किसानों का आरोप, बीमा कंपनियां सर्वे में लापरवाही कर रहीं। पढ़ें अनुपम दीक्षित की रिपोर्ट...

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Banswara Farmers

बारिश ने छीना सहारा (फोटो- पत्रिका)

बांसवाड़ा: दक्षिण राजस्थान में पिछले साल भी बारिश ने आदिवासी किसानों के खेतों में फसलें बर्बाद कर दी थी। लेकिन उन्हें ‘ऊंट के मुंह में जीरे’ के समान क्लेम राशि मिली। इस साल हुई फसल बर्बादी को लेकर भी किसान गहरी निराशा में डूब गए हैं।


अनावृष्टि से करोड़ों की फसलें बर्बाद होने के बाद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को मायूसी हाथ लगी। बांसवाड़ा की बात करें तो वर्ष 2024 में 46,739 किसानों ने फसल बीमा कराया था, जिसका करीब 10 करोड़ का प्रीमियम जमा हुआ। हैरानी की बात है कि €क्लेम के रूप में इस साल किसानों को 7 करोड़ रुपए ही मिले। बीमा राशि से कम क्लेम राशि मिलना दर्शाता है कि बीमा कंपनियां पैसा कमा रही हैं।


किसान नेताओं का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से लगातार यह देखा जा रहा है कि किसान प्रीमियम के रूप में करोड़ों रुपए जमा कराते हैं, लेकिन जब मुआवजे की बात आती है तो बीमा कंपनियां हाथ खींच लेती हैं। इस साल भी यही हुआ। जून से सितंबर तक दो दौर में हुई रिकॉर्डतोड़ बारिश से खेतों में खड़ी म€क्का, सोयाबीन, मूंग, उड़द और कपास की फसलें पूरी तरह चौपट हो गईं।


बीमा कंपनियों की मनमानी


किसान रणछोड़ पाटीदार का कहना है कि बीमा कंपनियां सर्वे के नाम पर खानापूर्ति करती हैं। प्रभावित क्षेत्रों का सही आकलन नहीं हो रहा है। यही वजह है कि दावा राशि कम दी जाती है। कई किसानों ने आरोप लगाया कि उनके खेतों में 80-90 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो गई, लेकिन सर्वे रिपोर्ट में 20-30 प्रतिशत ही नुकसान दिखाया। उन्हें पूरा मुआवजा नहीं मिला।


सरकार ने भी मूंदी आंख


इस मामले में न केंद्र सरकार, न ही राज्य सरकार ध्यान दे रही। किसानों का कहना है कि सरकार को बीमा कंपनियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए। यदि किसान प्रीमियम दे रहा है तो उसे उसकी मेहनत का सही मुआवजा भी मिले। आदिवासी अंचल के किसान पहले से आर्थिक रूप से कमजोर हैं और फसल की बर्बादी के बाद क्लेम राशि से कम मुआवजा मिलना घाटे का सौदा है।

इतनी हुई थी बारिश


वर्ष 2024 में बांसवाड़ा जिले में 1099 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई थी। जबकि औसत वर्षा 990 एमएम थी। सज्जनगढ़ ऐसा क्षेत्र था, जहां सीजन में 1504 एमएम बारिश हुई थी।

इतना जमा हुआ था प्रीमियम


-कुल बीमित किसान: 46,739
-किसानों की किस्त राशि: 2.97 करोड़
-केंद्र सरकार की प्रीमियम राशि: 3.47 करोड़
-राज्य सरकार की प्रीमियम राशि: 3.47 करोड़
-किसानों को मिली बीमा राशि: 6.95 करोड़


इतना हुआ था खराबा


-बागीदौरा तहसील में 113 गांव प्रभावित और खराबा 58 प्रतिशत
-गढ़ी तहसील में 130 गांव प्रभावित और खराबा 50 प्रतिशत
-बांसवाड़ा तहसील में 84 गांव प्रभावित और खराबा 49 प्रतिशत
-अरथूना तहसील में 77 गांव प्रभावित और खराबा 44 प्रतिशत
-गांगड़तलाई तहसील में 180 गांव प्रभावित और खराबा 42 प्रतिशत
-घाटोल तहसील में 97 गांव प्रभावित और खराबा 40 प्रतिशत
-अरथूना तहसील में 136 गांव प्रभावित और खराबा 40 प्रतिशत

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