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Video : बेणेश्वर धाम बना टापू… पहली बार 400 फीट की ऊंचाई से देखें वागड़ प्रयाग का विहंगम दृश्य

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बांसवाड़ा

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Ashish Bajpai

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Updated: 24 Aug 2018, 12:25 PM IST

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Video : बेणेश्वर धाम बना टापू... पहली बार 400 फीट की ऊंचाई से देखें वागड़ प्रयाग का विहंगम दृश्य

बांसवाड़ा. माही, सोम और जाखम नदियों में उफान के कारण चहुंओर से पानी से घिरने के बाद तीर्थ स्थल बेणेश्वर धाम गुरुवार को दूसरे दिन भी टापू बना रहा। सुबह नदियों का जलस्तर कम होने से धाम में मौजूद पचास लोगों में रामदेवरा से लौटे दस श्रद्धालु और दस श्रमिक साबला पुल पर बह रहे हल्के पानी में से बाहर आ गए। शेष दुकानदार और धाम पर रहने वाले लोग हैं जो वहीं पर रुके हुए हैं। दोपहर में नदियों का जलस्तर फिर एक बार बढ़़ा तो साबला, गनोड़ा और वलाई पुल पर फिर आवाजाही बंद हो गई, लेकिन शाम को साबला पुल पर फिर पानी कम हो गया। बेणेश्वर धाम के त्रिवेणी संगम पर 25 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों का विर्सजन भी होना है। एक सौ बीस मीटर की ऊंचाई से टापू बने बेणेश्वर और उसके आस-पास का यह विहंगम नजारा ड्रोन कैमरे की मदद से कैद किया रितेश पंचाल, पत्रिका के फोटो जर्नलिस्ट दिनेश तंबोली और संवाददाता विनोद नायक ने।

बेणेश्वर धाम के पुलों पर चल रही पानी की चादर, जान जोखिम में डालकर पुल पार करते रहे लोग
साबला/डूंगरपुर/बांसवाड़ा. लगातार बारिश के बाद वागड प्रयाग बेणेश्वरधाम मंगलवार को टापू में तब्दील होने के बाद गुरुवार करीब चार बजे बाद साबला-बेणेश्वर पुल पर जलस्तर कुछ कम होने पर लोग जोखिम उठाकर पुल से गुजरे वहीं, बेणेश्वर वालाई तथा बेणेश्वर-बांसवाड़ा माही पुल पर करीब पांच फीट की चादर चली। बुधवार सुबह साबला पुल पर करीब एक से दो फीट पानी की चादर के बीच राम देवरा के श्रद्धालु एवं मावजी के पेनोरमा के श्रमिक परस्पर हाथ-पकड़ कर सुरक्षित बाहर निकले। इस दरम्यान साबला थाना अधिकारी धूलजी प्रजापत व पुलिस कर्मी मौजूद रहे। धाम पर किसी को जाने की अनुमति नहीं दी गई। शाम करीब चार बजे साबला पुल पर पानी का स्तर और कम हो गया। इसके बाद इस पुल पर लोग दुपहिया व जीप से पुल को पार करते रहे। लेकिन बहते पानी में वाहन निकालकर अपनी जान जोखिम में डालने वालों को रोकने के कहीं कोई व्यवस्था नहंी थी और इस दौरान हादसे की आशंका बनी रही।

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