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Rajasthan Politics : नहीं रहे 4 बार के विधायक नवनीत निनामा, जनसंघ से भाजपा तक के सफर का एक सुनहरा अध्याय हुआ समाप्त

राजस्थान भाजपा के कद्दावर स्तंभ और घाटोल से चार बार विधायक रहे नवनीत लाल निनामा का गुरुवार को निधन हो गया, जिससे वागड़ अंचल में शोक की लहर दौड़ गई है।
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बांसवाड़ा

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Nakul Devarshi

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Updated: 24 Apr 2026, 12:03 PM IST

Navneet Ninama - File PIC

Navneet Ninama - File PIC

राजस्थान की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। घाटोल विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नवनीत लाल निनामा ने गुरुवार को अंतिम सांस ली। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे निनामा को श्वसन संबंधी समस्या थी, जिसके चलते उनका देहावसान हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही समूचे बांसवाड़ा जिले और प्रदेश भाजपा परिवार में शोक की लहर छा गई। शुक्रवार सुबह उनके पैतृक गांव गरनावट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

CM भजनलाल और वसुंधरा राजे ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

निनामा के निधन पर प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व ने गहरा शोक व्यक्त किया है:

सीएम भजनलाल शर्मा: "संगठन के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास हेतु उनका समर्पित जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।"

वसुंधरा राजे: "उन्होंने सदैव अगली पीढ़ी को संबल देने के प्रयास किए। समाज के प्रति उनके योगदान को हमेशा कृतज्ञता के साथ याद किया जाएगा।"

मदन राठौड़, वासुदेव देवनानी, सतीश पूनिया: नेताओं ने उन्हें आदिवासी समाज की बुलंद आवाज और जनसेवा का पर्याय बताया।

नवनीत निनामा: वो 10 बातें, जो कम ही लोग जानते हैं

नवनीत निनामा का जीवन केवल चुनावी जीत-हार का आंकड़ा नहीं था, बल्कि वह संघर्ष और सादगी की एक खुली किताब थे। आइये जानते हैं उनके जीवन के वो अनछुए पहलू:

  1. जनसंघ के संस्थापक सदस्य: निनामा उन गिने-चुने नेताओं में से थे जिन्होंने राजस्थान में जनसंघ (आज की भाजपा) की नींव रखी थी। वे 1963 में ही राजनीति के मैदान में उतर गए थे।
  2. मीसा के तहत जेल यात्रा: लोकतंत्र की रक्षा के लिए निनामा ने कभी समझौता नहीं किया। 1975 के आपातकाल के दौरान उन्होंने जमकर विरोध किया और 1976 से जुलाई 1977 तक मीसा (MISA) के तहत जेल की सलाखों के पीछे रहे।
  3. घाटोल के 'अजेय' योद्धा: उन्होंने घाटोल विधानसभा का चार अलग-अलग दशकों में प्रतिनिधित्व किया। वे 1985, 1990, 2003 और 2013 में विधायक चुने गए, जो उनकी लंबी राजनीतिक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
  4. संगठन के प्रति निष्ठा: वे 1968 से 1975 तक जनसंघ के जिलाध्यक्ष रहे और बाद में 1977 से 1998 की लंबी अवधि के दौरान कई बार भाजपा के जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली।
  5. आदिवासी समाज के सुधारक: राजनीति से इतर, निनामा को एक प्रमुख समाज सुधारक के रूप में जाना जाता था। उन्होंने वागड़ अंचल में शिक्षा और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अनवरत अभियान चलाया।
  6. सादगी की मिसाल: चार बार विधायक रहने के बावजूद निनामा का जीवन बेहद सादगी भरा था। उन्होंने कभी भी पद को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और अपने पैतृक गांव गरनावट की माटी से हमेशा जुड़े रहे।
  7. नई पीढ़ी के मार्गदर्शक: सतीश पूनिया और वसुंधरा राजे जैसे नेताओं के अनुसार, निनामा ने हमेशा युवा नेताओं को आगे बढ़ाने और उन्हें राजनीतिक संबल देने का कार्य किया।
  8. अटूट निष्ठा: उनके बारे में कहा जाता था कि पार्टी की विचारधारा उनके रग-रग में बसी थी। कठिन से कठिन दौर में भी उन्होंने कभी दल नहीं बदला।
  9. क्षेत्र का सर्वांगीण विकास: घाटोल में सिंचाई योजनाओं और सड़क नेटवर्क को मजबूत करने में निनामा का बड़ा योगदान रहा है।
  10. अंतिम यात्रा: शुक्रवार सुबह 9 बजे जब उनका पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन होगा, तो उनके साथ वागड़ की राजनीति का एक ऐसा अध्याय समाप्त होगा जिसने 'सेवा ही धर्म' के मंत्र को जिया।

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