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राजस्थान का यह अस्पताल बना प्रसूताओं से अवैध वसूली का अड्डा, खून बहता है… तो बहने दो, टांके लगवाने हैं तो पहले ₹2500 दो

नर्सिंग अधीक्षक को प्रसूता की परिजन ने बताया कि मंगलवार तड़के तीन बजे प्रसव पीड़ा पर वह भूंगड़ा-सोमपुर निवासी गर्भवती को लेकर अस्पताल पहुंचे। प्रसव के लिए महिला नर्सिंग कार्मिक ने 2500 रुपए मांगे।

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Banswara Mahatma Gandhi District Hospital

पत्रिका फोटो

आशीष बाजपेयी
राजस्थान के बांसवाड़ा महात्मा गांधी जिला अस्पताल में नर्सिंगकर्मियों ने पेशे को शर्मसार कर दिया। प्रसूता का बहता खून देखकर भी मानवता को ताक में रखकर ढाई हजार रुपए नहीं मिलने तक न टांके लगाए और न ही खून रोकने का उपचार किया। एक हजार मिले तो बिना एनेस्थिसिया दिए टांके लगाए।

अवैध वसूली की यह एक घटना नहीं है बल्कि यहां प्रसूताओं और नवजात के हाथ लगाने के भी पैसे वसूले जा रहे हैं। ऐसा वाकया मंगलवार सुबह सामने आया। मामला तूल पकड़ने पर नर्सिंग अधीक्षक ने वार्ड पहुंच प्रसूताओं से बातचीत की।

बच्चे की मौत के बाद भी मांगे दो हजार

बांसवाड़ा के सज्जनगढ़ की प्रसूता ने बताया कि सोमवार सुबह अस्पताल पहुंची। उसे गर्भ में बच्चा उल्टा होने की बात कही और दो हजार रुपए ले लिए। बच्चे की गर्भ में मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन यह जानते हुए भी पैसा मांगा गया।

प्रसव के लिए मांगे 1500 रुपए

उपला घंटाला क्षेत्र की एक प्रसूता ने बताया कि प्रसव पीड़ा पर वह परिजनों के साथ रविवार को एमजी अस्पताल पहुंची, जहां प्रसव कराने के लिए 1500 रुपए देने पड़े।

रुपए कम थे तो नहीं दिया एनेस्थिसिया

नर्सिंग अधीक्षक को प्रसूता की परिजन ने बताया कि मंगलवार तड़के तीन बजे प्रसव पीड़ा पर वह भूंगड़ा-सोमपुर निवासी गर्भवती को लेकर अस्पताल पहुंचे। प्रसव के लिए महिला नर्सिंग कार्मिक ने 2500 रुपए मांगे। प्रसव के बाद प्रसूता को टांके लगाने में ना-नुकुर की।

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परिजनों ने एक हजार लेने और बाकी बाद में देने को कहा तो नर्सिंगकर्मी ने पूरे पैसे मांगे। वह प्रसूता को बिना एनेस्थिसिया दिए ही टांके लगाने लगी। परिजन ने स्पॉट एनेस्थिसिया देकर टांके लगाने को कहा, लेकिन उसने एक न सुनी। बात बढ़ी तो नर्सिंगकर्मी ने टांके लगाने के बाद प्रसूता को एनेस्थिसिया दे दिया।

नर्सिंगकर्मियों से स्पष्टीकरण मांगेंगे। अन्य प्रसूताओं से वसूली के आरोपों की भी जांच कर रहे हैं। 1500 रुपए की मांग की बात सही नहीं है, ऐसा कार्मिकों नेबताया है।

  • दीपक भट्ट, नर्सिंग अधीक्षक, एमजी अस्पताल, बांसवाड़ा

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