
बांसवाड़ा : पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी के परिवार में संपत्ति विवाद, वसीयतें एवं दस्तख्त जांच के लिए एफएसएल पहुंचे
बांसवाड़ा. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. हरिदेव जोशी के परिवार में वर्षों से चल रहे सम्पत्ति विवाद में चल रही जांच के तहत पुलिस ने विवादित वसीयतें और कमला जोशी के दस्तख्त जांच के लिए एफएसएल को भेजे हैं। प्रकरण के जांच अधिकारी एसआई तुलसीराम ने बताया कि इस संपत्ति की एक वसीयत 18 नवंबर 1994 में कोर्ट में पेश हुई थी। जिसे पुलिस ने वहां से निकलवाया। पेंशन विभाग से पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी की मां कमला जोशी के असली दस्तख्त भी प्राप्त किए गए हैं। इसके अलावा वसीयत पर किए गए दस्तख्त भी प्राप्त कर लिए हैं। वसीयतों को जांच के लिए एफएसएल भेजा गया है। अब वहां से रिपोर्ट आने का इंतजार है।
जयपुर वैशाली नगर में भी प्रकरण दर्ज
कोतवाली थाना प्रभारी शैतान सिंह नाथावत ने बताया कि इस संपत्ति विवाद के मामले में एक अन्य प्रकरण वर्ष 2014 दिसंबर में जयपुर के वैशाली नगर थाने में प्रकरण दर्ज हो रखा है। इस मामले में वहां की पुलिस ने भी वसीयत एवं दस्तख्त एफएसएल जांच के लिए भेज रखे हैं। प्रकरण समान होने की वजह से दोनों प्रकरणों की एफएसएल की जांच भी सामान होगी।
12 प्रकरण दर्ज
जांच अधिकारी ने बताया कि इन परिवारों में सम्पत्ति को लेकर अब तक करीब 12 प्रकरण दर्ज हैं। एसआई ने बताया कि दिनेश ने सिविल वाद लगाकर जयपुर की कोर्ट में पेश कर रखा था। पुलिस ने एक वसीयत की कॉपी वहां कोर्ट से भी प्राप्त की है। पुलिस को यह वसीयत सात दिसंबर 2017 को प्राप्त हुई थी।
पौत्र ने दर्ज कराया था प्रकरण
गौरतलब है कि हरिदेव जोशी के पौत्र जयपुर पुरानी चुंगी अजमेर रोड, जोशी फार्म हाउस निवासी रवि जोशी पुत्र सुरेश जोशी ने जयपुर पुरानी चुंगी अजमेर रोड निवासी हरिदेव जोशी के बेटे दिनेश चन्द्र जोशी और दिनेश के बेटे कुमार जोशी तथा दिनेश की पत् नी जयंती जोशी के खिलाफ दर्ज कराए प्रकरण में बेशकीमती जमीन को हड़पने के लिए कूटरचित वसीयत तैयार करने व खांदू कॉलोनी के भूखण्ड को खुर्दबुर्द करने का आरोप लगाया है।
ये है आरोप
रवि का आरोप है कि परदादा पन्नालाल जोशी के स्वामित्व एवं आाधिपत्य का करीब दो करोड़ का दो मंजिला मकान बांसवाड़ा नई आबादी में है। जबकि एक पुश्तैनी मकान गांव खांदू तहसील बांसवाड़ा में था जो माही बांध की डूब में आने के कारण उसके बदले में राज्य सरकार ने एक भूखण्ड खांदू विस्थापितों के लिए बनी कॉलोनी में परदादा पन्नालाल जोशी के नाम आवंटित हुआ, जिसका कब्जा उनको चार दिसंबर 1975 को दिया गया, लेकिन पन्नालाल जोशी का देहांत ग्यारह मई 1985 को हो जाने के कारण उस सम्पत्ति का पट्टा पन्नालाल के समस्त वारिस के नाम जारी करने के बजाय परदादी कमला जोशी के नाम कर दिया गया। दोनों सम्पत्तियां अविभाजित थी जिसेे दिनेश जोशी पुत्र हरिदेव जोशी, कुमार जोशी और जयंती व अन्य ने परदादी कमला जोशी के हस्ताक्षरों से कूटरचित दस्तावेजों के जरिये हथियाने का षड्यंत्र रचा।
Published on:
29 Aug 2018 03:01 pm
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