
फाइल फोटो पत्रिका
Banswara News : बांसवाड़ा जिले में इस बार गेहूं की गुणवत्ता कमजोर रहने और उत्पादन कम होने के चलते अभी तक सरकारी केंद्रों पर गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य खरीद शुरू नहीं हो सकी है। गेहूं की गुणवत्ता किसानों को परेशान कर रही है। इसे लेकर जिला कलक्टर ने संयुक्त निदेशक कृषि से गेहूं के सैंपल मंगवाए हैं। सोमवार को डीएसओ, एग्रीकल्चर और एफसीआई के अधिकारियों की एक मीटिंग बुलाई है। बैठक में गेहूं की गुणवत्ता कमजोर रहने को लेकर चर्चा की जाएगी एवं चर्चा कर एक प्रस्ताव भी सरकार को भेजा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि गेहूं की गुणवत्ता कमजोर होने को लेकर राजस्थान पत्रिका ने 19 मार्च के अंक में ‘जिले में हर साल गिर रहा गेहूं का उत्पादन, गुणवत्ता भी कमजोर’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था।
कृषि विभाग ने पूरे जिले में गेहूं के कमजोर उत्पादन रहने को लेकर हर पंचायत समिति सहित तहसील स्तर पर तीन से चार सैंपल मंगवाए हैं। कुल 100 से अधिक सैंपल की जांच होने के बाद गुणवत्ता की खराब रिपोर्ट आने पर एफसीआइ के माध्यम से राज्य सरकार को एक रिपोर्ट भेजी जाएगी, ताकि किसानों के इस गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद हो सके। इसके साथ ही इन सैंपलों को कृषि अनुसंधान केंद्र भी भेजा जाएगा, ताकि इनकी जांच हो सके।
हर साल तीन नवंबर से दस नवंबर के बीच बुवाई करते हैं। पूर्व में भी माही से जल प्रवाह पर ही किसान बुवाई करते आए हैं, लेकिन विगत तीन-चार साल से किसानों के उत्पादन में गुणवत्ता की कमजोर आई है, जिससे उन्हें मंडी में उसका भाव नहीं मिल रहा है। गेहूं की गुणवत्ता की समस्या को लेकर कृषि अनुसंधान केंद्र को भी बताया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। इसलिए एफसीआई स्थानीय गेहूं को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे।
रणछोड़ पाटीदार, प्रांतीय उपाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ
हमने तहसील स्तर एवं ग्राम पंचायत पर गेहूं के तीन से चार सैंपल मंगवाए हैं, जिससे आंकलन किया जाएगा कि वास्तव में सभी के गेहूं का उत्पादन कमजोर है या कुछ ही जगह की समस्या है। जांच के बाद जिला कलक्टर को भी बताया जाएगा और चर्चा कर उनकी वाजिब समस्या को आगे भेजेंगे।
कृषि मीणा, संयुक्त निदेशक, बांसवाड़ा
Published on:
23 Mar 2026 06:30 pm
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